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जौहर यूनिवर्सिटी को बचाने और मोहम्मद आज़म ख़ान व अब्दुल्ला आज़म ख़ान को इंसाफ दिलाने के लिए 30 अगस्त को जंतर-मंतर पर विशाल धरना-प्रदर्शन

राष्ट्रीय प्रेस विज्ञप्ति

जौहर यूनिवर्सिटी को बचाने और मोहम्मद आज़म ख़ान व अब्दुल्ला आज़म ख़ान को इंसाफ दिलाने के लिए 30 अगस्त को जंतर-मंतर पर विशाल धरना-प्रदर्शन

मोहम्मद अरशद खान, राष्ट्रीय सचिव समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय अध्यक्ष अम्बेडकर विचार मंच एवं पूर्व विधायक जौनपुर सदर का बयान
नई दिल्ली। मोहम्मद अरशद खान ने एक बयान में कहा कि मोहम्मद आज़म ख़ान साहब, उनके परिवार और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी, रामपुर के साथ वर्षों से जिस प्रकार का व्यवहार किया जा रहा है, वह बेहद चिंताजनक है। 2019 के बाद जिस तेजी से मोहम्मद आज़म ख़ान साहब, उनके परिवार और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मुकदमे सामने आए, उनकी निष्पक्ष, स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच कराया जाना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले मोहम्मद आज़म ख़ान साहब और उनके परिवार के विरुद्ध इस प्रकार बड़ी संख्या में मुकदमे नहीं थे, लेकिन लोकसभा चुनाव में उनकी जीत के बाद कुछ ही महीनों के भीतर लगभग साढ़े तीन सौ मुकदमे दर्ज किए जाने की बात सामने आई। इतने कम समय में इतनी बड़ी संख्या में मुकदमों का दर्ज होना स्वाभाविक रूप से गंभीर सवाल खड़े करता है। इन सभी मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि देश की जनता के सामने सच्चाई आ सके कि कौन से मुकदमे वास्तविक हैं और किन मामलों में राजनीतिक दबाव या द्वेष की कोई भूमिका रही है।
मोहम्मद अरशद खान ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को दोषी या निर्दोष घोषित करने का अंतिम अधिकार न्यायपालिका का है। इसलिए हमारी मांग है कि मोहम्मद आज़म ख़ान साहब, उनके परिवार और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े सभी मामलों की निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराई जाए। यदि किसी मुकदमे में आरोप निराधार पाए जाते हैं तो उसे कानून के अनुसार समाप्त किया जाए और यदि किसी मामले में दोष सिद्ध होता है तो न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार निर्णय हो। यही वास्तविक न्याय है।
उन्होंने कहा कि मोहम्मद आज़म ख़ान साहब उत्तर प्रदेश की राजनीति के वरिष्ठतम नेताओं में से एक हैं। वह दस बार विधायक, दो बार सांसद, चार बार उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और एक बार नेता प्रतिपक्ष रह चुके हैं। लगभग पांच दशकों के उनके सार्वजनिक जीवन को देखते हुए उनके मामलों की निष्पक्ष समीक्षा आवश्यक है।
मोहम्मद अरशद खान ने कहा कि मोहम्मद आज़म ख़ान साहब ने शिक्षा, राजनीति और सामाजिक जीवन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और उनके योगदान का सम्मान होना चाहिए। मेरी व्यक्तिगत दृष्टि में उनके योगदान और सार्वजनिक जीवन को देखते हुए उन्हें भारत रत्न जैसे सर्वोच्च नागरिक सम्मान के योग्य माना जा सकता है।
उन्होंने कहा कि मोहम्मद आज़म ख़ान साहब और उनके परिवार से जुड़े मामलों का परीक्षण राजनीतिक प्रतिशोध की दृष्टि से नहीं, बल्कि कानून, संविधान और न्याय की कसौटी पर होना चाहिए। आज़म ख़ान साहब जेल में हैं, उनके परिवार के सदस्य भी जेल जा चुके हैं और अब्दुल्ला आज़म ख़ान साहब को भी बार-बार जेल की परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है। यह स्थिति अत्यंत पीड़ादायक है।
मोहम्मद अरशद खान ने भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश, सर्वोच्च न्यायालय, माननीय राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री से अपील की कि इस पूरे प्रकरण का संज्ञान लेते हुए एक स्वतंत्र विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएं तथा सभी मामलों की समग्र और समयबद्ध समीक्षा कराई जाए। यदि जांच में कोई व्यक्ति निर्दोष पाया जाता है तो उसे न्याय मिलना चाहिए और यदि किसी मामले में कानून का उल्लंघन सिद्ध होता है तो कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
जौहर यूनिवर्सिटी को गिराने के बजाय बचाने की जरूरत
मोहम्मद अरशद खान ने कहा कि सरकारों का काम स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय बनाना तथा शिक्षा का विस्तार करना होना चाहिए, शिक्षण संस्थानों को गिराना नहीं।
उन्होंने कहा कि मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी, रामपुर एक बड़ा शैक्षणिक संस्थान है, जिसे स्थापित करने के पीछे वर्षों की मेहनत और बड़ी संख्या में लोगों का सहयोग रहा है। विश्वविद्यालय से शिक्षक, कर्मचारी, विद्यार्थी और उनके परिवार जुड़े हुए हैं। इसलिए विश्वविद्यालय की इमारतों के विरुद्ध की जा रही कार्रवाई का प्रभाव केवल एक संस्था पर नहीं, बल्कि हजारों विद्यार्थियों और कर्मचारियों के भविष्य पर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों को लेकर जारी किए गए ध्वस्तीकरण संबंधी नोटिस को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए और विश्वविद्यालय के भविष्य तथा विद्यार्थियों की शिक्षा को सुरक्षित किया जाना चाहिए। इस पूरे मामले में भी कानून के अनुसार निष्पक्ष जांच और न्यायिक समीक्षा होनी चाहिए।
मोहम्मद अरशद खान ने कहा कि हमारी मांगें पूरी तरह स्पष्ट हैं—
जौहर यूनिवर्सिटी रामपुर के विरुद्ध 38 इमारतों से संबंधित ध्वस्तीकरण नोटिस वापस लिया जाए।
जौहर यूनिवर्सिटी के विकास, सुरक्षा और शैक्षणिक गतिविधियों को सुनिश्चित किया जाए।
मोहम्मद आज़म ख़ान साहब, अब्दुल्ला आज़म ख़ान साहब और उनके परिवार से जुड़े सभी मुकदमों की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच कराई जाए।
पूरे प्रकरण की जांच के लिए स्वतंत्र SIT का गठन किया जाए।
जिन मामलों में आरोप निराधार पाए जाएं, उन्हें कानून के अनुसार समाप्त किया जाए और निर्दोष लोगों को तत्काल न्याय मिले।
मोहम्मद आज़म ख़ान साहब और अब्दुल्ला आज़म ख़ान साहब को न्यायिक प्रक्रिया के तहत यदि निर्दोष पाया जाए तो उनकी तत्काल रिहाई सुनिश्चित की जाए।
जौहर यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों के भविष्य की रक्षा की जाए।
30 अगस्त को जंतर-मंतर पर विशाल शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन
मोहम्मद अरशद खान ने कहा कि इन्हीं मांगों को लेकर 30 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर विशाल शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जा रहा है।
उन्होंने देशवासियों, समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं, छात्रों, शिक्षकों, किसानों, नौजवानों, सामाजिक संगठनों तथा न्याय और लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले सभी लोगों से अपील करते हुए कहा—
“आप सभी 30 अगस्त को जंतर-मंतर, नई दिल्ली पहुंचकर इस शांतिपूर्ण आंदोलन को अपनी ताकत दें। हमारा संघर्ष किसी व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध नहीं, बल्कि न्याय, लोकतंत्र, शिक्षा और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए है। हम चाहते हैं कि मोहम्मद आज़म ख़ान साहब, अब्दुल्ला आज़म ख़ान साहब और उनके परिवार को निष्पक्ष न्याय मिले तथा मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी, रामपुर को सुरक्षित रखा जाए।”

उन्होंने कहा कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आयोजित किया जाएगा। हमारा उद्देश्य किसी कानून-व्यवस्था की स्थिति को प्रभावित करना नहीं, बल्कि संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज सरकार और देश के सामने रखना है।
मोहम्मद अरशद खान
राष्ट्रीय सचिव, समाजवादी पार्टी
राष्ट्रीय अध्यक्ष, अम्बेडकर विचार मंच
पूर्व विधायक, जौनपुर सदर (366)

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