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लखनऊ: कसमंडी कलां विवाद फिर गरमाया; सावन के पहले सोमवार जल चढ़ाने पहुंचे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका, सुरक्षा व्यवस्था सख्त

लखनऊ: कसमंडी कलां विवाद फिर गरमाया; सावन के पहले सोमवार जल चढ़ाने पहुंचे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने रोका, सुरक्षा व्यवस्था सख्त

​लखनऊ | (मलिहाबाद): मलिहाबाद क्षेत्र स्थित कसमंडी कलां के विवादित ढांचे को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। सावन के पहले सोमवार को ‘लाखन आर्मी’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष Suraj Pasi सैकड़ों समर्थकों के साथ विवादित ढांचे की ओर ‘जलाभिषेक’ करने के लिए बढ़े। हालांकि, मौके पर मुस्तैद भारी पुलिस बल ने उन्हें मुख्य स्थल से करीब 200 मीटर पहले ही बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया।

​मुख्य बातें

​सांकेतिक जलार्पण व धरना: बैरिकेडिंग पर रोके जाने से नाराज कार्यकर्ताओं ने वहीं जमीन पर बैठकर विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसके बाद ACP मलिहाबाद ज्ञानेंद्र सिंह से काफी देर चली बातचीत के बाद सूरज पासी ने बैरिकेडिंग के सामने ही सांकेतिक जलाभिषेक किया और वापस लौट गए।
​पवित्र जल और मिट्टी: लाखन आर्मी के अनुसार, वे 108 गांवों से एकत्र की गई पवित्र मिट्टी और जल लेकर दोपहर लगभग 12 बजे जलाभिषेक करने पहुंचे थे।

​क्या है कसमंडी कलां का पूरा विवाद?

​दावा और इतिहास: लाखन आर्मी और पासी समाज का दावा है कि यह स्थल सन 980 से 1031 के दौरान महाराजा कंस पासी का ऐतिहासिक किला और प्राचीन शिव मंदिर था। उनका कहना है कि आज भी दीवारों और खंभों पर प्राचीन हिंदू स्थापत्य कलाकृतियां अंकित हैं।

​दूसरा पक्ष व सरकारी रिकॉर्ड: दूसरे पक्ष का कहना है कि सरकारी दस्तावेजों में यह संपत्ति मस्जिद और मकबरे के रूप में दर्ज है।

ताज़ा मांगें: 21 मई को लाखन आर्मी ने जिलाधिकारी (DM) को ज्ञापन सौंपकर इस विवादित ढांचे की कार्बन डेटिंग कराने की मांग की थी। इसके बाद ढांचे में नमाज़ अदा करने पर रोक लगा दी गई थी। तत्पश्चात, हनुमान चालीसा पाठ और धरने जैसे प्रयास भी हुए।

प्रशासनिक स्थिति: क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए कसमंडी कलां में भारी पुलिस बल और सुरक्षाकर्मी तैनात हैं।

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