Breaking Newsभारत

सादात (गाजीपुर) : प्राथमिक विद्यालय परिसर में मृत गोवंश दफनाने का प्रयास, ग्रामीणों के विरोध पर पीछे हटा नगर प्रशासन

मंडल रिपोर्टर शिव प्रकाश पांडे की रिपोर्ट।

प्राथमिक विद्यालय परिसर में मृत गोवंश दफनाने का प्रयास, ग्रामीणों के विरोध पर पीछे हटा नगर प्रशासन

मीडिया और स्थानीय नागरिकों की सक्रियता से टला बड़ा खतरा, स्कूल का वातावरण दूषित होने से बचा

सादात (गाजीपुर)। नगर पंचायत प्रशासन की एक बड़ी लापरवाही बुधवार को उस समय उजागर हुई, जब प्राथमिक विद्यालय सादात प्रथम के परिसर में मृत पड़े एक गोवंश को गड्ढा खोदकर दफनाने का प्रयास किया जा रहा था। मामले की जानकारी मिलते ही स्थानीय नागरिकों और मीडियाकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर इसका कड़ा विरोध किया, जिसके बाद प्रशासन को अपना निर्णय बदलना पड़ा।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विद्यालय परिसर में जेसीबी मशीन से गड्ढा खोदा जा चुका था और मृत गोवंश को वहीं दफनाने की तैयारी चल रही थी। इस बीच ग्रामीणों को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने तत्काल विरोध दर्ज कराया। देखते ही देखते मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई और नगर प्रशासन के इस कदम पर सवाल उठने लगे।ग्रामीणों का कहना था कि विद्यालय परिसर बच्चों के अध्ययन का स्थान है, जहां मृत पशु को दफनाने से वातावरण दूषित होने के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी गंभीर खतरे उत्पन्न हो सकते थे। लोगों ने इसे प्रशासन की गंभीर लापरवाही बताते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की।मामला अधिशासी अधिकारी सोनल जैन एवं चेयरमैन प्रतिनिधि धर्मेन्द्र यादव सोनू के संज्ञान में लाया गया। इसके बाद नगर पंचायत प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल हस्तक्षेप किया। नगर पंचायत के सफाई नायक के निर्देश पर विद्यालय परिसर में जेसीबी से खोदे गए गड्ढे को पुनः भरवा दिया गया तथा मृत गोवंश को वहां से हटाकर अन्य उपयुक्त स्थान पर ले जाकर दफनाया गया।टला बड़ा खतरा, लोगों में रोष बरकरार स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते इस मामले का विरोध न किया गया होता, तो विद्यालय परिसर का वातावरण दूषित हो सकता था। इससे न केवल स्कूल में अध्ययनरत बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता, बल्कि संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका भी बढ़ जाती।ग्रामीणों ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। इस घटना ने नगर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि विरोध के बाद प्रशासन ने अपनी गलती सुधार ली, लेकिन इस पूरे प्रकरण को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी और रोष अभी भी बना हुआ है।क्षेत्रीय नागरिकों ने मांग की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो तथा सार्वजनिक संस्थानों, विशेषकर विद्यालय परिसरों के संबंध में निर्णय लेते समय आवश्यक मानकों और स्वास्थ्य सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button