गोरखपुर : आमी समेत नदियों और जलस्त्रोतों को बचाने की उठी आवाज

आमी समेत नदियों और जलस्त्रोतों को बचाने की उठी आवाज
जन आयोग का गठन
नदियों और जलस्त्रोतों के किनारे आयोजित होगी जल पंचायतें
गोरखपुर

पूर्वांचल में बढ़ते जल प्रदूषण, नदी प्रदूषण, अतिक्रमण एवं पर्यावरण संकट जैसे गंभीर विषयों को लेकर आज प्रेस क्लब सभागार में “पानी की बात, आपके साथ” विषय पर एक महत्वपूर्ण सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में आमी समेत पूर्वांचल की नदियों, तालाबों, झीलों एवं जलस्त्रोतों को बचाने के लिए व्यापक जनआंदोलन चलाने का संकल्प लिया गया।
सम्मेलन में यह भी घोषणा की गई कि आने वाले समय में नदियों और जलस्त्रोतों के किनारे जल पंचायतों का आयोजन किया जाएगा, ताकि आमजन को इस अभियान से जोड़ा जा सके।
सम्मेलन के मुख्य अतिथि प्रो. शरद चंद्र मिश्र ने कहा कि जल प्रदूषण के कारण आर्सेनिक जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं, जो अत्यंत चिंता का विषय है। समय रहते इस पर रोक लगाई जानी चाहिए, अन्यथा आम लोगों के जीवन पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
वरिष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक कार्यकर्ता मनोज सिंह ने कहा कि नदियों के प्रदूषण से आम आदमी सर्वाधिक प्रभावित है। सरकार की प्राथमिकता में नदियों को बचाने के बजाय कॉर्पोरेट हितों को संरक्षण देना दिखाई देता है। अब हमें एक बार फिर मजबूती से संघर्ष के लिए आगे आना होगा।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए विश्वविजय सिंह ने कहा कि लंबे जनसंघर्ष और कानूनी लड़ाई के बाद भी आमी जैसी नदियों को बचाने के लिए सरकार द्वारा कोई ठोस कदम न उठाया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। यदि यही स्थिति रही तो आने वाली पीढ़ियों के सामने बड़ा जल संकट खड़ा होगा। उन्होंने कहा कि हम फिर एक बार संघर्ष के रास्ते पर चलने के लिए तैयार हैं।
सिविल कोर्ट बार एसोसिएशन के मंत्री अनुज अस्थाना ने कहा कि जीवन बचाने के संघर्ष में जहां भी कानूनी लड़ाई की आवश्यकता होगी, अधिवक्ता समुदाय उसके लिए पूरी तरह तैयार है।
सामाजिक कार्यकर्ता अशोक चौधरी ने कहा कि कॉर्पोरेट को फायदा पहुंचाने के लिए गरीबों से साफ पानी का अधिकार छीना जा रहा है।
सम्मेलन की अध्यक्षता डॉ. संत पूज्य हरिशरण शास्त्री एवं संचालन विक्रांत साहनी ने की।
सम्मेलन में सर्वसम्मति से निम्न प्रस्ताव पारित किए गए :
आमी नदी को प्रदूषित करने वाले उद्योगों पर तत्काल कठोर कार्रवाई की जाए तथा शीघ्र सीईटीपी (कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) स्थापित किया जाए।
पूर्वांचल की सभी नदियों को प्रदूषण एवं अतिक्रमण से मुक्त कराया जाए।
पूर्वांचल की नदियों के फ्लड प्लेन, झीलों एवं तालाबों की भूमि पर किसी भी प्रकार की विकास योजना प्रस्तावित न की जाए। यदि कोई परियोजना स्वीकृत या संचालित हो, तो उसे तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।
बाढ़ प्रबंधन या कटान रोकने के नाम पर बड़ी मशीनों द्वारा नदी प्रवाह को परिवर्तित करने वाली योजनाओं पर रोक लगाई जाए।
नदियों पर निर्भर जनसमुदाय की आजीविका सहित सभी अधिकारों की गारंटी की जाए।
नदी कटान से प्रभावित परिवारों का समुचित पुनर्वास किया जाए।
सम्मेलन ने यह भी प्रस्ताव पारित किया कि पूर्वांचल की सभी नदियों के प्रदूषणमुक्त एवं निर्बाध प्रवाह को सुनिश्चित करने हेतु “जन आयोग” का गठन किया जाए। यह जन आयोग नदियों के संरक्षण, स्वच्छ प्रवाह, प्राकृतिक स्वरूप की रक्षा तथा नदी पर निर्भर जनसमुदाय की आजीविका सुनिश्चित करने के लिए कार्य करेगा। आयोग में समाज के सभी तबकों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा।
सम्मेलन में प्रमुख रूप से देवेंद्र निषाद, अर्पित श्रीवास्तव, विकास सिंह, चंद्रिका भारती, भीम विश्वकर्मा, जितेंद्र विश्वकर्मा, निर्मला पासवान, अशोक निषाद ,मेनिका पाण्डेय, सुनीला देवी, सविता राय, ऊषा श्रीवास्तव,शाहील विक्रम तिवारी, जितेन्द्र पाण्डेय, तसनीम असलम, अशोक कश्यप, महेन्द्र नाथ मिश्रा, डाक्टर पी एन भट्ट,अभिमन्यु विश्वकर्मा,अभय सिंह, महेन्द्र मोहन उर्फ गुड्डू तिवारी,कुशुम पाण्डेय, दयानंद यादव,राम बेलाश मौर्या,रामू कुशवाहा,गब्बु लाल प्रजापति,अनसुमान पाठक , आदियन्स गांधी, मोहम्मद इरफान,मोनू राय , राजेश निषाद,राजकुमार मौर्या, राकेश मौर्या, सुहेल अंसारी, रामचरित निषाद, सुभाष दास,समेत बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।



