AIIMS गोरखपुर द्वारा 5वीं हेड एवं नेक लाइव सर्जरी एवं कैडेवेरिक वर्कशॉप का आयोजन

AIIMS गोरखपुर द्वारा 5वीं हेड एवं नेक लाइव सर्जरी एवं कैडेवेरिक वर्कशॉप का आयोजन

गोरखपुर।एम्स गोरखपुर के ईएनटी विभाग द्वारा, गोरखपुर ओआरएल सोसाइटी के सहयोग से, 5वीं हेड एवं नेक हैंड्स-ऑन कैडेवेरिक डिसेक्शन वर्कशॉप एवं लाइव सर्जिकल डेमोंस्ट्रेशन का आयोजन 24 से 26 अप्रैल 2026 तक किया जा रहा है।
कार्यशाला का उद्घाटन मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता, कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ, एम्स गोरखपुर द्वारा किया गया। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा एवं उन्नत शल्य प्रशिक्षण में संस्थान की उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। यह इस श्रृंखला की लगातार पाँचवीं कार्यशाला है।
इस आयोजन का मुख्य आकर्षण उन्नत थायरॉयड सर्जरी का लाइव प्रदर्शन है, जिसमें क्षेत्र की पहली स्कारलेस एंडोस्कोपिक थायरॉयडेक्टॉमी (TOETVA) के साथ-साथ ओपन थायरॉयडेक्टॉमी भी शामिल है।
कार्यक्रम के प्रथम दिवस की लाइव सर्जिकल सत्रों का संचालन प्रतिष्ठित हेड एवं नेक सर्जनों द्वारा किया गया, जिनमें वाराणसी के एमपीएमएमसीसी के प्रोफेसर एवं अग्रणी सर्जन डॉ. असीम मिश्रा, जो ऑन्कोलॉजिक हेड एवं नेक सर्जरी में अपने व्यापक अनुभव के लिए जाने जाते हैं, तथा अहमदाबाद के ज़ायडस कैंसर अस्पताल के हेड एवं नेक एवं स्कल बेस ऑनकोसर्जन डॉ. सिद्धार्थ शाह, जो उन्नत एवं मिनिमली इनवेसिव तकनीकों में विशेषज्ञता रखते हैं, शामिल रहे।
इनके साथ अन्य विशिष्ट संकाय सदस्य जैसे डॉ. इंदु शुक्ला, डॉ. स्वाग्निक चक्रवर्ती एवं डॉ. रवि शंकर ने मॉडरेटर, डेमोंस्ट्रेटर एवं पैनल विशेषज्ञ के रूप में योगदान दिया।
प्रथम दिवस पर दो व्यापक पैनल चर्चाएं भी आयोजित की गईं। थायरॉयड प्रबंधन पर आयोजित पैनल में न्यूक्लियर मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. सुकांत बरई (SGPGI) एवं एम्स गोरखपुर की पैथोलॉजिस्ट डॉ. मिमना ने भाग लिया, जिसमें डिफरेंशिएटेड थायरॉयड कैंसर (DTC) के दिशा-निर्देश, फॉलो-अप एवं उपचार प्रोटोकॉल पर चर्चा की गई। दूसरे पैनल में थायरॉयड सर्जरी के सर्जिकल दृष्टिकोण एवं महत्वपूर्ण पहलुओं पर सभी संकाय सदस्यों की सक्रिय सहभागिता रही, जिसमें ऑपरेटिव रणनीतियों एवं क्लिनिकल निर्णय प्रक्रिया पर विशेष बल दिया गया।
इस कार्यशाला में देशभर के प्रतिष्ठित संस्थानों से विशेषज्ञ संकाय की उपस्थिति रही, जिससे उच्च स्तरीय अकादमिक आदान-प्रदान एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण सुनिश्चित हुआ।
वैज्ञानिक कार्यक्रम में द्वितीय दिवस पर थायरॉयड सर्जरी एवं नेक डिसेक्शन के कैडेवेरिक डेमोंस्ट्रेशन एवं हैंड्स-ऑन सत्र तथा तृतीय दिवस पर पैरोटिड सर्जरी, साथ ही सर्जिकल तकनीकों एवं लोको-रीजनल फ्लैप्स पर सत्र आयोजित किए जाएंगे।
इस कार्यक्रम में देशभर से स्नातकोत्तर छात्र, रेजिडेंट्स एवं प्रैक्टिसिंग सर्जन भाग ले रहे हैं, जिन्हें अपने शल्य कौशल को उन्नत करने का एक महत्वपूर्ण मंच प्राप्त हो रहा है।
अपने उद्घाटन संबोधन में कार्यकारी निदेशक ने बेहतर रोगी परिणामों हेतु सटीकता, सतत सीखने एवं नवीन शल्य तकनीकों को अपनाने के महत्व पर जोर दिया।
आयोजकों ने बताया कि इस कार्यशाला का उद्देश्य संरचित प्रशिक्षण, लाइव प्रदर्शन एवं इंटरएक्टिव चर्चाओं के माध्यम से सैद्धांतिक ज्ञान एवं व्यावहारिक शल्य कौशल के बीच की खाई को पाटना है।
उद्घाटन समारोह में डॉ. अजय भारती (मेडिकल सुपरिंटेंडेंट), डॉ. विवेक मिश्रा (विभागाध्यक्ष, एनाटॉमी विभाग) एवं डॉ. संतोष शर्मा (विभागाध्यक्ष, एनेस्थीसियोलॉजी विभाग) की गरिमामयी उपस्थिति रही।
इस अवसर पर विभिन्न विभागों के डेलीगेट्स, संकाय सदस्य एवं रेजिडेंट्स उपस्थित रहे।
आयोजन समिति में ईएनटी विभाग की प्रभारी डॉ. रुचिका अग्रवाल, डॉ. पंखुरी मित्तल, डॉ. अश्वनी चौधरी एवं विभाग के रेजिडेंट्स शामिल हैं।



