यूपी’साइबर सिंघम’ फौज की तकनीक के जाल में फंसेंगे अपराधी, 5 चरणों में 500 विशेषज्ञ होंगे तैयार; जानें प्लान

यूपी’साइबर सिंघम’ फौज की तकनीक के जाल में फंसेंगे अपराधी, 5 चरणों में 500 विशेषज्ञ होंगे तैयार; जानें प्लान
साइबर अपराध रोकने के लिए उत्तर प्रदेश में सभी जिलों में साइबर विशेषज्ञ तैनात किए जाएंगे। पांच चरणों में पांच सौ फोरेंसिक विशेषज्ञ तैयार किए जा रहे हैं। अब तक तीन सौ प्रशिक्षित हो चुके हैं। ये टीमें डिजिटल साक्ष्य जुटाकर अपराधियों की पहचान तेज करेंगी और जांच को मजबूत बनाएंगी।
साइबर अपराध पर अंकुश लगाने के लिए प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। इसके लिए सभी 75 जिलों में ‘साइबर सिंघम’ की फौज तैयार की जा रही है। जो पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर वैज्ञानिक और साइबर आधारित जांच के जरिए अपराधियों पर नकेल कसेगी।
यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फोरेंसिक साइंस में पांच चरणों में 500 फोरेंसिक एक्सपर्ट तैयार करने की योजना बनाई गई है। इस पर काम भी शुरू हो गया है। अब तक 300 विशेषज्ञ प्रशिक्षित किए जा चुके हैं, जबकि शेष बैचों का प्रशिक्षण जल्द पूरा होगा।
ये प्रशिक्षित अधिकारी अपने-अपने जिलों में जाकर अन्य पुलिसकर्मियों को भी ट्रेनिंग देंगे, जिससे पूरी पुलिस व्यवस्था में वैज्ञानिक सोच का विस्तार होगा। प्रशिक्षण के दौरान अफसरों को क्राइम सीन मैनेजमेंट, डिजिटल एविडेंस प्रिजर्वेशन, साइबर ट्रैकिंग और फोरेंसिक एनालिसिस की गहन जानकारी दी जा रही है।
इससे घटनास्थल पर साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और अपराध की सटीक पड़ताल करने में बड़ी मदद मिलेगी। संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने बताया कि चौथा बैच 27 अप्रैल से शुरू होगा। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रदेश को तकनीक-सक्षम और मजबूत कानून-व्यवस्था की दिशा में बड़ा कदम है।
क्या है ‘साइबर सिंघम’ प्लान
हर जिले में प्रशिक्षित फोरेंसिक टीम
क्राइम सीन पर तत्काल वैज्ञानिक जांच
डिजिटल साक्ष्यों का सुरक्षित संग्रह
साइबर अपराधों की तेज ट्रैकिंग
पुलिसिंग में क्या बदलेगा
जांच अधिक सटीक और पारदर्शी होगी
अपराधियों की जल्द पहचान हो सकेगी।
तकनीक आधारित कार्रवाई से सजा दर बढ़ेगी



