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लखनऊ केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में सर्वर ठप, तीमारदारों के साथ रोगियों को झेलनी पड़ी परेशानी; लगी रहीं कतारें

लखनऊ केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में सर्वर ठप, तीमारदारों के साथ रोगियों को झेलनी पड़ी परेशानी; लगी रहीं कतारें

राजधानी स्थित केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में सर्वर ठप होने से तीमारदारों के साथ रोगियों को परेशानी झेलनी पड़ी। जांच रिपोर्ट व सैंपल जमा न होने से लंबी-लंबी कतारें लगी रही

राजधानी लखनऊ में केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में बृहस्पतिवार को सर्वर ठप हो गया। इससे मरीजों और उनके तीमारदारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। खून के नमूने जमा करने से लेकर जांच रिपोर्ट लेने में हर जगह लंबी कतारें लग गईं। फीस जमा करने और इमरजेंसी पंजीकरण कराने में भी लोगों को घंटों दुश्वारियां झेलनी पड़ीं।केजीएमयू का यह ट्रॉमा सेंटर चार सौ बेड की क्षमता है। बड़ी संख्या में गंभीर मरीजों को स्ट्रेचर पर भर्ती करके इलाज मुहैया कराया जाता है। मरीजों की पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी की ज्यादातर महत्वपूर्ण जांचें इसी ट्रॉमा सेंटर में की जाती हैं। दोपहर करीब एक बजे अचानक सर्वर डाउन हो गया। सर्वर ठप होने के कारण मरीजों और उनके तीमारदारों को खासी दिक्कतें झेलनी पड़ीं।

पैथोलॉजी काउंटर से लेकर गैलरी तक लंबी कतारें लग गईं। तीन से चार कतारें लगने से पूरे परिसर में भारी अव्यवस्था फैल गई। करीब एक घंटे तक पूरे अफरातफरी मची रही। केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. केके सिंह के मुताबिक, कुछ समय के लिए सर्वर में दिक्कत आई थी। इस वजह से कतार लग गई थी।

जांच और रिपोर्ट मिलने में बाधा

सर्वर डाउन होने का सीधा और गंभीर असर मरीजों की आवश्यक जांच प्रक्रियाओं पर पड़ा। खून के नमूने जमा करने में तीमारदारों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। पैथोलॉजी के बाद नमूना जमा करने के लिए तीमारदारों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं। रेडियोलॉजी की विभिन्न जांचों में भी यही अव्यवस्था और देरी देखने को मिली। सर्वर ठप होने से मरीजों को अपनी महत्वपूर्ण जांच रिपोर्ट मिलने में भी देरी लगी।

पंजीकरण और शुल्क भुगतान की दुश्वारियां

इमरजेंसी में आने वाले मरीजों के पंजीकरण और शुल्क जमा करने वालों को भी परेशानी झेलनी पड़ीं। सर्वर की खराबी के कारण सभी प्रक्रियाएं मैनुअल तरीके से करनी पड़ीं। इसमें सामान्य से अधिक समय लगा। इससे पंजीकरण और फीस काउंटरों पर भीड़ बढ़ गई। लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा। ट्रॉमा सेंटर में 24 घंटे से अधिक समय तक भर्ती रहने वाले मरीजों से ही शुल्क लिया जाता है। इससे कम समय के लिए भर्ती मरीजों को मुफ्त इलाज की सुविधा मिलती है। सर्वर की समस्या ने इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया को भी बुरी तरह बाधित किया।

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