गोरखपुर : गोरखपुर जंक्शन या ‘ओपन बार’? स्टेशन चौराहे पर शाम ढलते ही सजती है जाम की महफिल!

गोरखपुर जंक्शन या ‘ओपन बार’? स्टेशन चौराहे पर शाम ढलते ही सजती है जाम की महफिल!
खाकी की नाक के नीचे ‘मधुशाला’ बना स्टेशन चौराहा: चखना, सोडा और शराब… दुकानों पर सब ‘हाजिर’ है!
यात्रियों की सुरक्षा दांव पर! रेलवे स्टेशन चौराहे पर शराबियों का कब्जा, पुलिस और आबकारी विभाग मौन।

गोरखपुर। शहर का सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण माना जाने वाला ‘रेलवे स्टेशन चौराहा’ इन दिनों शराबियों के खुले हुड़दंग का अड्डा बन गया है। शाम ढलते ही यहाँ का नजारा किसी ओपन बार जैसा नजर आने लगता है। ताज्जुब की बात यह है कि यात्रियों की सुरक्षा का दम भरने वाली पुलिस और राजस्व का दावा करने वाला आबकारी विभाग, दोनों इस ‘खुले खेल’ से बेखबर बने हुए हैं।
दुकान नहीं, बाकायदा ‘सर्विस’ दी जा रही है
स्टेशन चौराहे के आसपास स्थित होटल, रेस्टोरेंट और यहाँ तक कि फुटपाथ पर लगने वाले ठेले भी इस अवैध कारोबार में शामिल हैं। सूत्रों की मानें तो यहाँ ग्राहकों को न केवल शराब और बियर पीने की जगह दी जाती है, बल्कि पानी, सोडा, डिस्पोजेबल गिलास और चखने की मुकम्मल व्यवस्था भी मुहैया कराई जाती है। दुकानदार चंद रुपयों के लालच में सार्वजनिक स्थानों को मयखाने में तब्दील कर रहे हैं।
यात्रियों में दहशत, बढ़ सकती है बड़ी वारदात
गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर रोजाना हजारों की संख्या में यात्रियों का आवागमन होता है। इनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल होते हैं। चौराहे पर शराबियों के जमघट और उनके बीच होने वाली गाली-गलौज से आम राहगीर सहमे रहते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि वक्त रहते इस पर लगाम नहीं लगाई गई, तो नशे में धुत ये तत्व किसी बड़ी अप्रिय घटना या मारपीट को अंजाम दे सकते हैं।
मिलीभगत का संदेह?
हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ उस चौराहे पर हो रहा है जहाँ पुलिस की पिकेट और गश्त अक्सर बनी रहती है। चर्चा आम है कि आबकारी विभाग और स्थानीय पुलिस की कथित ‘अनदेखी’ के चलते ही यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है।
बड़ा सवाल: क्या प्रशासन किसी बड़ी वारदात का इंतजार कर रहा है? क्या शहर के प्रवेश द्वार को इस तरह शराबियों के हवाले छोड़ देना उचित है?



