प्रगतिशील सोच और अधिवक्ता कल्याण ही बार एसोसिएशन की असली ताकत: मनोज कुमार पांडेय

प्रगतिशील सोच और अधिवक्ता कल्याण ही बार एसोसिएशन की असली ताकत: मनोज कुमार पांडेय
गोरखपुर। “बार एसोसिएशन का नेतृत्व केवल एक पद का चुनाव नहीं, बल्कि अधिवक्ता समाज की गरिमा और न्याय प्रणाली की साख का सवाल है। हमें व्यक्तिगत संबंधों की सीमाओं को लांघकर ऐसी प्रगतिशील सोच को चुनना होगा, जो अधिवक्ताओं के सम्मान और सुरक्षा के लिए समर्पित हो।”
यह आह्वान दीवानी कचहरी, गोरखपुर के युवा अधिवक्ता मनोज कुमार पांडेय ‘छोटू’ ने आगामी बार एसोसिएशन चुनाव के मद्देनजर किया। उन्होंने मतदाता अधिवक्ताओं से राजनीति और व्यक्तिगत संबधों से ऊपर उठकर योग्य उम्मीदवारों के चयन की अपील की है।
भविष्य के नेतृत्व के लिए 5 सूत्रीय विज़न
अधिवक्ता मनोज कुमार पांडेय ने चुनाव में उम्मीदवारों की योग्यता को परखने के लिए कुछ ठोस मुद्दे सामने रखे हैं:
युवा शक्ति को संबल: शुरुआती 5 वर्षों तक जूनियर अधिवक्ताओं के लिए 5,000 रुपये मासिक स्टाइपेंड की सुनिश्चित व्यवस्था।
वरिष्ठों का सम्मान: बुजुर्ग अधिवक्ताओं के लिए गेट से चेंबर तक आवागमन हेतु सुगम और सुरक्षित परिवहन की सुविधा।
आपातकालीन सुरक्षा कवच: किसी अधिवक्ता के आकस्मिक निधन या गंभीर बीमारी की स्थिति में तत्काल 5 लाख रुपये की सहायता राशि का प्रावधान।
गरिमापूर्ण कार्यस्थल: महिला अधिवक्ताओं के लिए परिसर में आधुनिक और स्वच्छ वाशरूम का निर्माण।
सुरक्षित वातावरण: न्यायालय परिसर में सभी अधिवक्ताओं के लिए एक भयमुक्त और सम्मानजनक कार्य संस्कृति का विकास।
साख और चरित्र को दें प्राथमिकता
उन्होंने जोर देकर कहा कि अधिवक्ताओं को ऐसे प्रतिनिधियों का चुनाव करना चाहिए जिनका चरित्र उत्तम हो और जो कानून की मर्यादा को समझते हों। “वोट केवल उसे दें जो सेवा भावना और योग्यता की कसौटी पर खरा उतरे, न कि केवल व्यक्तिगत परिचय के आधार पर।”



