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गोरखपुर : चौरीचौरा-खजनी एसडीएम पर आदेश न मानने का आरोप डीएम से शिक़ायत

तबंहसील प्रशासन की कार्यशैली पर उठे सवाल

चौरीचौरा-खजनी एसडीएम पर आदेश न मानने का आरोप डीएम से शिक़ायत

गोरखपुर। जिलाधिकारी दीपक मीणा अपने कार्यालय में आने वाले फरियादियों की समस्याएं सुनकर उनका त्वरित समाधान कर रहे थे। इसी दौरान चौरीचौरा तहसील क्षेत्र की एक गंभीर समस्या को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता मुन्नीलाल यादव ग्राम प्रधानों और ग्रामीणों के साथ जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। उन्होंने चौरीचौरा तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि शासन और जिलाधिकारी के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद संबंधित अधिकारी आदेशों का पालन नहीं कर रहे हैं, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

वरिष्ठ अधिवक्ता मुन्नीलाल यादव ने जिलाधिकारी को अवगत कराया कि गोरखपुर जनपद के 43 गांवों को लेकर शासन द्वारा पहले नोटिफिकेशन जारी किया गया था और बाद में इन गांवों को सर्वे से तहसील में आने के लिए डी-नोटिफिकेशन करते हुए संबंधित तहसीलों को भेज दिया गया। शासन की ओर से स्पष्ट निर्देश दिया गया था कि सर्वे के दौरान जिन मुकदमों में जो भी आदेश और निर्णय दर्ज किए गए हैं, उन्हें संबंधित तहसीलों की कंप्यूटराइज्ड खतौनी में दर्ज किया जाए, ताकि राजस्व अभिलेखों में वास्तविक स्थिति परिलक्षित हो सके।

उन्होंने बताया कि तत्कालीन जिलाधिकारी कृष्ण करुणेश ने शासन के आदेशों का पालन करते हुए जनपद की सभी तहसीलों को इस संबंध में लिखित निर्देश जारी किए थे। इसके बाद जनपद की अधिकांश तहसीलों—सदर, गोला, कैंपियरगंज, खजनी, सहजनवा और बांसगांव—ने सर्वे के दौरान चले मुकदमों में दिए गए आदेशों और निर्णयों को कंप्यूटराइज्ड खतौनी में दर्ज करने का कार्य पूरा कर लिया।

लेकिन चौरीचौरा तहसील प्रशासन पर आरोप लगाते हुए मुन्नीलाल यादव ने कहा कि वहां के एसडीएम शासन और जिलाधिकारी के आदेशों का अनुपालन नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि डी-नोटिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी संबंधित मुकदमों के आदेश और निर्णय खतौनी में दर्ज नहीं किए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीणों को लगातार परेशान होना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि चौरीचौरा तहसील के अंतर्गत आने वाले कई गांवों के लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं। विशेष रूप से ग्राम खैरजुटा, सरार, मझगांवा, सिहोड़वा, सेमरोना और बौठा सहित कई गांवों के ग्रामीण सालों से तहसील के चक्कर लगाने को मजबूर हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। इससे ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति नाराजगी भी बढ़ती जा रही है।

मुन्नीलाल यादव ने जिलाधिकारी से मांग करते हुए कहा कि जब जनपद की अन्य तहसीलों में शासन के निर्देशों का पालन हो चुका है तो चौरीचौरा तहसील में इस कार्य को लंबित रखना समझ से परे है। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और शासन के आदेशों का तत्काल पालन सुनिश्चित कराया जाए।

इसी दौरान जिलाधिकारी कार्यालय में एक अन्य मामला भी सामने आया। खजनी तहसील क्षेत्र की एक महिला निवास प्रमाण पत्र बनवाने के लिए जिलाधिकारी से मिलने पहुंची थी। महिला ने बताया कि उसने कई बार आवेदन किया, लेकिन अभी तक उसका निवास प्रमाण पत्र नहीं बन पाया है।

महिला की शिकायत सुनते ही जिलाधिकारी दीपक मीणा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए खजनी के एसडीएम को फोन पर कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने निर्देश देते हुए कहा कि संबंधित महिला का निवास प्रमाण पत्र आज शाम तक बनाकर उपलब्ध कराया जाए और इसकी सूचना उन्हें मोबाइल पर भेजी जाए।
इसके अलावा जिलाधिकारी कार्यालय में मृतक आश्रित से जुड़ा एक मामला सामने आया। मृतक युवक की माता और भाई जिलाधिकारी से मिलने पहुंचे और उन्होंने बताया कि उनके बेटे की शादी नहीं हुई थी, लेकिन एक महिला खुद को मृतक की पत्नी बताकर नौकरी पाने की कोशिश कर चुकी है।

परिजनों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी दीपक मीणा ने इस पूरे मामले की जांच मुख्य राजस्व अधिकारी को सौंप दी और निर्देश दिया कि मामले की निष्पक्ष जांच कर जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।

जिलाधिकारी कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई के दौरान कई अन्य फरियादी भी अपनी समस्याओं को लेकर पहुंचे।

जिलाधिकारी ने सभी मामलों को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और स्पष्ट कहा कि आम जनता की समस्याओं के समाधान में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता मुन्नीलाल यादव ने कहा कि शासन के आदेशों का समयबद्ध तरीके से पालन करना प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी है। यदि अधिकारी ही आदेशों की अनदेखी करेंगे तो आम जनता को न्याय मिलने में कठिनाई होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि जिलाधिकारी के हस्तक्षेप के बाद ग्रामीणों की समस्याओं का शीघ्र समाधान होगा।

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