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गाजीपुर के इस गांव में एक दिन बाद क्यों मनाई जाती है होली, हैरान कर देगी ये प्राचीन मान्यता

गाजीपुर के इस गांव में एक दिन बाद क्यों मनाई जाती है होली, हैरान कर देगी ये प्राचीन मान्यता

गाजीपुर के भीमापार गांव में सदियों पुरानी परंपरा के चलते पूरे देश के एक दिन बाद होली मनाई जाती है. इसके पीछे दो तर्क दिए जाते हैं. इस दिन गांव में भारी हुड़दंग भी होता है, जिसके चलते आवागमन बंद रहता है और पुलिस तैनात की जाती है.
होली का पर्व रंग, अबीर, गुलाल और खुशियों का त्योहार है, जिसकी तैयारी लोग हफ्तों पहले से शुरू कर देते हैं. लेकिन उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में एक ऐसा गांव है, जहां की परंपरा और मान्यताएं पूरे देश से बिल्कुल अलग हैं. सादात ब्लॉक के भीमापार ग्राम पंचायत में पिछले कई दशकों से मुख्य तिथि के अगले दिन होली मनाने की परंपरा चली आ रही है.

पंचांग के अनुसार, ब्राह्मण और ज्योतिषाचार्य तिथि व नक्षत्रों के आधार पर पर्व की तारीख घोषित करते हैं. पूरा देश चैत्र कृष्ण प्रतिपदा को होली मनाता है, लेकिन भीमापार बाजार में यह पर्व द्वितीया तिथि को मनाया जाता है. इस वर्ष भी, जहां चंद्रग्रहण के कारण पूरा देश बुधवार को होली मनाएगा, वहीं भीमापार में रंगों का यह उत्सव 5 मार्च को मनाया जाएगा l

इस गांव में एक दिन बाद होली मनाने के पीछे दो प्रमुख तर्क दिए जाते हैं. पहले तर्क के मुताबिक, बुजुर्गों के अनुसार प्राचीन समय में भीमापार में नर्तकियां रहती थीं. होली के दिन गांव के प्रतिष्ठित लोग और ग्रामीण आसपास के जमींदारों के घरों पर होली खेलने चले जाते थे. इस कारण मुख्य दिन पर गांव में कोई नहीं रहता था. अगले दिन जब सब लौटते थे, तब गांव में होली मनाई जाती थी.

वहीं, दूसरे तर्क के मुताबिक, ग्रामीणों का मानना है कि किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति या संत के निधन के कारण यह परंपरा शुरू हुई. गांव के कुछ लोगों ने इस प्रथा को बदलने का प्रयास भी किया, लेकिन मान्यता है कि जब भी ऐसा प्रयास हुआ, गांव में कोई न कोई अनिष्ट या अशुभ घटना घट गई. इसी डर और श्रद्धा के कारण ग्रामीण आज भी पूर्वजों की परंपरा निभा रहे हैं.

हुड़दंग ऐसा कि बंद हो जाते हैं रास्ते:

भीमापार की होली अपने उल्लास और हुड़दंग के लिए भी मशहूर है. होली वाले दिन (दूसरे दिन) इस बाजार से कोई भी वाहन नहीं गुजरता है. यदि कोई अनजान व्यक्ति भूलवश बाजार में प्रवेश कर जाए, तो उसे रंगों से सराबोर कर दिया जाता है. इस भारी हुड़दंग को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने पड़ते हैं और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात करना पड़ता है.

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