वकीलों के भारी विरोध के आगे झुकी सरकार; ई-रजिस्ट्री का नया शासनादेश तत्काल प्रभाव से निरस्त

वकीलों के भारी विरोध के आगे झुकी सरकार; ई-रजिस्ट्री का नया शासनादेश तत्काल प्रभाव से निरस्त
लखनऊ/गोरखपुर: उत्तर प्रदेश सरकार ने वकीलों और डीड राइटर्स (दस्तावेज लेखकों) के चौतरफा विरोध और हड़ताल के आगे कदम पीछे खींच लिए हैं। सरकार ने ई-रजिस्ट्री (ई-पंजीकरण) से जुड़े 4 जून 2026 के शासनादेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। इस फैसले को प्रदेश भर के अधिवक्ताओं और रजिस्ट्री कार्यालयों से जुड़े कर्मियों की एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।
विवाद और सरकार के यू-टर्न की मुख्य बातें:
भ्रम और रोजगार का संकट: स्टांप एवं पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल ने आदेश वापसी की घोषणा करते हुए कहा कि नवाचार (डिजिटलाइजेशन) के इस प्रयास में शासनादेश पूरी तरह स्पष्ट नहीं था। इसके चलते अधिवक्ताओं और डीड राइटर्स के बीच रोजगार छिनने का भ्रम पैदा हो गया था, जिसे दूर करने के लिए जनहित में इसे रद्द किया गया है।
प्रदेशव्यापी आंदोलन और हड़ताल: इस डिजिटल व्यवस्था के विरोध में गोरखपुर समेत पूरे उत्तर प्रदेश के अधिवक्ता, स्टांप विक्रेता और दस्तावेज लेखक पिछले कई दिनों से लामबंद थे। आंदोलनकारियों ने 3 जुलाई तक पूर्ण कार्य बहिष्कार का ऐलान कर रखा था, जिससे तहसीलों और रजिस्ट्री दफ्तरों का कामकाज ठप हो गया था।
संवाद के बाद ही अगला कदम: सरकार ने भरोसा दिलाया है कि भविष्य में ई-रजिस्ट्री की दिशा में कोई भी कदम उठाने से पहले बार एसोसिएशन और सभी संबंधित पक्षों के साथ बैठकर व्यापक संवाद किया जाएगा, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और सर्वमान्य बन सके।
हड़ताल वापसी पर सस्पेंस: सरकार के इस फैसले के बाद आंदोलनकारी खेमे में खुशी की लहर है। हालांकि, हड़ताल को आधिकारिक रूप से वापस लेने पर बार एसोसिएशन की अहम बैठक में अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है।



