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लखनऊ में 30 अगस्त को वकीलों के चैंबर तोड़ने की तैयारी पर हंगामा, अधिवक्ताओं ने कहा – हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की हो रही अनदेखी

लखनऊ में 30 अगस्त को वकीलों के चैंबर तोड़ने की तैयारी पर हंगामा, अधिवक्ताओं ने कहा – हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की हो रही अनदेखी

*लखनऊ।* राजधानी लखनऊ में अधिवक्ताओं के चैंबरों के प्रस्तावित ध्वस्तीकरण को लेकर विवाद बढ़ गया है। शनिवार को दोपहर 3 बजे वकीलों ने प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नगर निगम प्रशासन पर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं करने का आरोप लगाया।

वकीलों का कहना है कि नगर निगम ने 30 अगस्त को चैंबरों के ध्वस्तीकरण की तैयारी की है, जबकि हाईकोर्ट ने 4 अगस्त के आदेश में शेष 58 चैंबरों के लिए नोटिस, जवाब और सुनवाई के बाद कार्रवाई की स्पष्ट प्रक्रिया तय की थी।

*हाईकोर्ट ने 58 चैंबरों के लिए तय की थी प्रक्रिया*

अधिवक्ताओं के मुताबिक, हाईकोर्ट ने 4 अगस्त 2026 को आदेश जारी किया था। इसमें 72 में बचे 58 चैंबरों को लेकर आगे की कार्रवाई के लिए स्पष्ट प्रक्रिया बताई गई थी। आदेश के अनुसार संबंधित लोगों को नई नोटिस जारी करनी थी, नोटिस पर मिले जवाब पर विचार करने के बाद निर्णय से अवगत कराना था। इसके बाद ध्वस्तीकरण से पहले 10 दिन का समय देते हुए दो प्रमुख समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित कराया जाना था। वकीलों का कहना है कि प्रशासन ने इस प्रक्रिया के अनुरूप कार्रवाई नहीं की।

*करीब 250 चैंबरों पर फॉर्मेट चिपकाया गया*

अधिवक्ताओं का आरोप है कि हाईकोर्ट के आदेश के करीब 15 दिन बाद 19 अगस्त को 58 चैंबरों के बजाय करीब 250 चैंबरों पर एक फॉर्मेट चस्पा कर दिया गया। इसे नोटिस के रूप में पेश किया गया। इसी दिन अखबार में 30 अगस्त को चैंबरों के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई किए जाने का विज्ञापन भी प्रकाशित करा दिया गया।

वकीलों का कहना है कि इससे ऐसा प्रतीत होता है कि फॉर्मेट चस्पा करने और जवाब लेने की प्रक्रिया से पहले ही ध्वस्तीकरण का फैसला लिया जा चुका था। ऐसे में बाद में किसी व्यक्ति से जवाब मांगने या सुनवाई करने की प्रक्रिया का कोई औचित्य नहीं रह जाता।

*नगर निगम अधिनियम की प्रक्रिया का पालन नहीं*

अधिवक्ताओं ने प्रशासन पर उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम के तहत निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं करने का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि नोटिस के नाम पर चस्पा किया गया फॉर्मेट धारा 554 और 564 में निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है।

वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के ‘In Re: Manoj Tibrewal’ मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों का भी हवाला दिया है। उनका कहना है कि प्रभावित अधिवक्ताओं को विधिसम्मत नोटिस और अपना पक्ष रखने का प्रभावी अवसर दिए बिना चैंबर तोड़ने की कार्रवाई नहीं की जा सकती।

*कार्रवाई हुई तो अवमानना याचिका दाखिल करेंगे*

अधिवक्ताओं ने प्रशासन से 30 अगस्त को प्रस्तावित ध्वस्तीकरण की कार्रवाई तत्काल रोकने की मांग की है। उनका कहना है कि आगे की कोई भी कार्रवाई हाईकोर्ट के 4 अगस्त के आदेश, नगर निगम अधिनियम के प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार ही की जाए, अन्यथा वे अवमानना याचिका दाखिल करेंगे।

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