रायबरेली : तालाब पर दबंगों का कब्ज़ा, लेखपाल की ‘सांठ-गांठ’ और पीड़ित परिवार पर झूठा मुकदमा!

तालाब पर दबंगों का कब्ज़ा, लेखपाल की ‘सांठ-गांठ’ और पीड़ित परिवार पर झूठा मुकदमा!

रायबरेली। जिले के लालगंज तहसील के खीरों ब्लॉक में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक संरक्षण का एक भयावह सच सामने आया है। मेरूई गांव में दबंगों ने सरकारी अभिलेखों में दर्ज तालाब की भूमि गाटा संख्या 766/0.1700 पर अवैध निर्माण कर सरकार को खुली चुनौती दी है। हद तो तब हो गई, जब शिकायत करने वाले परिवार को ही ‘दबाने’ के लिए उन पर झूठे मुकदमे थोप दिए गए।
गांव की पीड़िता रीतू शर्मा का आरोप है कि गांव के तीन दबंगों ने भूमि गाटा संख्या 766/0.1700 रकबे वाली तालाब की सुरक्षित भूमि पर कब्जा लिया है। जब रीतू ने इसकी शिकायत आला अधिकारियों से की, तो क्षेत्रीय लेखपाल ने अपनी कथित ‘खाऊ-कमाऊ’ नीति का परिचय दिया। लेखपाल ने रिपोर्ट में तालाब की भूमि को आबादी बताकर लीपापोती कर दी, जिससे शिकायती पत्र को रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया। लेखपाल की इस संदिग्ध भूमिका ने दबंगों के हौसले इतने बुलंद कर दिए हैं कि तालाब की जमीन पर अवैध निर्माण आज भी निर्बाध जारी है।
दबंगों का खौफ इतना है कि पूरा गांव डरा हुआ है। जब पीड़िता ने बार-बार शिकायत की, तो विपक्षियों ने रंजिश के चलते रीतू के पति राजेश शर्मा समेत पूरे परिवार को फंसाने के लिए उन पर एससी-एसटी एक्ट जैसी संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज करवा दिया। यह दबंगों की एक सोची-समझी साजिश है, ताकि शिकायतकर्ता को कानूनी दांव-पेच में उलझाकर चुप कराया जा सके।
पीड़ित परिवार ने अब हार न मानते हुए एक बार फिर मुख्यमंत्री पोर्टल पर गुहार लगाई है। मांग स्पष्ट है कि एसडीएम लालगंज स्वयं मौके पर पहुंचकर निष्पक्ष जांच करें, तालाब की भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराएं और दोषियों के साथ-साथ मामले को दबाने वाले लेखपाल पर भी कठोर विभागीय कार्रवाई की जाए।
अब देखना है कि क्या प्रशासन इस बार भी अपनी आंखें मूंदे रखेगा या फिर भू-माफियाओं के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई होगी? यह सवाल अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।



