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गोरखपुर कभी थे करीबी, जुदा हुई राहें तो खिंचीं सियासी तलवारें; पहले साथ काम कर चुके दो नेताओं के एक-दूसरे पर आरोप

गोरखपुर कभी थे करीबी, जुदा हुई राहें तो खिंचीं सियासी तलवारें; पहले साथ काम कर चुके दो नेताओं के एक-दूसरे पर आरोप

कभी एक साथ काम करते नजर आने वाले नताओं की राहें जुदा हुई तो सियासी तलवारें खिंच गईं। पूर्व में एक साथ काम कर चुके दो नेताओं ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर गोरखपुर में सियासी सरगर्मियां बढ़ने लगी हैं। कभी एक साथ काम करते नजर आने वाले राकेश सिंह पहलवान और सुनील सिंह के बीच ताजा बयानबाजी चर्चा का विषय है। राकेश सिंह पहलवान विश्व हिंदू महासभा के पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री रहे चुके हैं और अब भाजपा से जुड़े हैं। सुनील सिंह हिंदू युवा वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं और इस समय सपा में हैं। दोनों का मंदिर से पूर्व में नाता जगजाहिर है पर आज रास्ते जुदा हैं।जो मंदिर का नहीं हुआ वह

अखिलेश का क्या होगा : पहलवानराजनीति में अपराधीकरण को लेकर मुझसे एक चैनल ने इंटरव्यू किया था, जिसमें मैंने बताया था कि कैसे पूर्व विधायक वीरेंद्र प्रताप शाही और पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी का खौफ था। इसी चर्चा में हिंदू युवा वाहिनी का प्रकरण सामने आया था। विश्व हिंदू महासंघ की युवा शाखा थी हिंदू युवा वाहिनी। पडरौना में एक जनसभा के बाद मैंने संगठन की घोषणा की थी।

प्रभारी राघवेंद्र सिंह को छोड़कर सभी पदाधिकारी के नाम तय किए गए थे। सुनील सिंह तो हमेशा लोगों को मंदिर से दूर करने की साजिश करते थे। मैं उन्हें मंदिर के करीब ले गया। उन्हें पता है कि वे क्यों भगाए गए थे। वे मुझ पर अनर्गल आरोप आरोप लगा रहे हैं। मुझे अपने बारे में बताने की जरूरत नहीं है, सभी लोग जानते हैं। वे सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का खास बनने के लिए ऐसा कर रहे हैं। बस इतना ही कहना है, जो मंदिर का नहीं हुआ वह अखिलेश का क्या होगा?

मंदिर से जुड़ने के लिए कर रहे अनर्गल प्रलाप : सुनील सिंहहिंदू युवा वाहिनी को मैंने खड़ा किया था। पहली मीटिंग वर्तमान में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ आरएमडी अग्रवाल के घर पर हुई थी। राकेश सिंह पहलवान तो हिंदू जागरण मंच में थे और फिर विश्व हिंदू महासंघ से जुड़े। मैं तो उनका बड़ा सम्मान करता रहा हूं पर उन्होंने मुझे अपराधी बताकर अपना कद कम कर लिया।

उनकी छटपटाहट समझ सकता हूं। मंदिर से वे हटाए गए थे। इस समय राजनीतिक हाशिए पर हैं तो मुझे टारगेट कर रहे हैं। मुझे अपराधी बताना और घर कब्जा करने की बात कहना उनकी मानसिक दिवालियापन को दर्शाता है। वे इसके जरिये मंदिर और मुख्यमंत्री से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उनका कोई जनाधार नहीं है। मैंने तो इसके लिए खुला चैलेंज भी किया है।

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