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गाजीपुर : भुड़कुड़ा पीजी कॉलेज में प्रशासनिक विवाद गहराया, स्थायी प्राचार्य ने निष्पक्ष जांच की उठाई मांग

भुड़कुड़ा पीजी कॉलेज में प्रशासनिक विवाद गहराया, स्थायी प्राचार्य ने निष्पक्ष जांच की उठाई मांग

समानांतर प्रशासन चलाने, प्रतिबंधित कर्मचारी को महाविद्यालय में प्रवेश दिलाने और दबाव बनाने के लगाए आरोप

गाजीपुर। जनपद के सहायता प्राप्त श्री महंथ रामाश्रय दास पी.जी. कॉलेज, भुड़कुड़ा में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। आयोग से विधिवत चयनित एवं स्थायी प्राचार्य प्रो. (सीएमए) बृजेश कुमार जायसवाल ने महाविद्यालय की प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।प्राचार्य प्रो. जायसवाल का आरोप है कि उन्हें प्रशासनिक रूप से कमजोर करने तथा उनकी वैधानिक शक्तियों को प्रभावित करने के उद्देश्य से महाविद्यालय में मौखिक रूप से एक अन्य व्यक्ति को प्राचार्य जैसी भूमिका में कार्य करने के लिए अधिकृत किया जा रहा है। उनका कहना है कि इससे महाविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है और भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है।प्राचार्य के अनुसार, महाविद्यालय के एक दैनिक कर्मचारी द्वारा लगातार संस्थान की आंतरिक सूचनाओं को तोड़-मरोड़कर बाहर प्रसारित किया जा रहा था। इस संबंध में उसे कई बार मौखिक रूप से चेतावनी दी गई। साथ ही लिखित रूप से क्षमायाचना भी कराई गई, लेकिन कथित रूप से उसके व्यवहार में सुधार नहीं हुआ। इसके चलते महाविद्यालय के शैक्षणिक एवं प्रशासनिक वातावरण को प्रभावित होता देख 10 मई को उसे तत्काल प्रभाव से महाविद्यालय परिसर में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया गया।प्राचार्य का आरोप है कि उक्त आदेश के बावजूद संबंधित कर्मचारी को महाविद्यालय में भेजा जा रहा है और उसकी उपस्थिति पंजिका पर हस्ताक्षर भी कराए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त शिक्षकों एवं कर्मचारियों को फोन कर अपने पास बुलाने तथा प्राचार्य के विरुद्ध कार्रवाई कराने के लिए विभिन्न प्रकार का दबाव बनाए जाने का भी आरोप लगाया गया है।प्रो. बृजेश कुमार जायसवाल ने कहा कि यदि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तो वास्तविक स्थिति स्वतः सामने आ जाएगी। उन्होंने सक्षम अधिकारियों से मांग की है कि मामले की पारदर्शी जांच कराकर महाविद्यालय की प्रशासनिक गरिमा, विधिसम्मत व्यवस्था तथा शैक्षणिक वातावरण की रक्षा सुनिश्चित की जाए।

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