गाजीपुर : डीएसआर तकनीक से धान की खेती को मिलेगा बढ़ावा, 50 प्रतिशत तक होगी पानी की बचत

डीएसआर तकनीक से धान की खेती को मिलेगा बढ़ावा, 50 प्रतिशत तक होगी पानी की बचत
कृषि विभाग ने खरीफ सीजन के लिए बनाई नई रणनीति, किसानों को किया जा रहा जागरूक
गाजीपुर, 25 जून। बदलते मौसम, संभावित कम वर्षा और लगातार गिरते भूजल स्तर को देखते हुए कृषि विभाग ने खरीफ सीजन में धान की खेती के लिए नई रणनीति तैयार की है। विभाग का विशेष जोर पारंपरिक रोपाई की बजाय डीएसआर (डायरेक्ट सीडेड राइस) तकनीक के माध्यम से धान की सीधी बुवाई को बढ़ावा देने पर है।जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार ने बताया कि कृषि विशेषज्ञों के अनुसार डीएसआर तकनीक अपनाने से किसान 30 से 35 प्रतिशत तक पानी की बचत कर सकते हैं। वहीं खेतों की परिस्थितियों के अनुसार यह बचत 50 से 60 प्रतिशत तक भी हो सकती है। शासन द्वारा जनपद गाजीपुर को इस वर्ष 1,29,532 हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती का लक्ष्य दिया गया है। लक्ष्य को समयबद्ध एवं वैज्ञानिक तरीके से पूरा करने के लिए कृषि विभाग के अधिकारी और कर्मचारी गांव-गांव जाकर किसानों को जागरूक कर रहे हैं।उन्होंने बताया कि पारंपरिक पद्धति में पहले नर्सरी तैयार करनी पड़ती है और बाद में पानी भरे खेतों में मजदूरों के माध्यम से धान की रोपाई की जाती है, जिससे पानी और श्रम दोनों पर अधिक खर्च आता है। जबकि डीएसआर तकनीक में धान की सीधी बुवाई की जाती है, जिससे खेत में लगातार पानी भरे रखने की आवश्यकता नहीं पड़ती और श्रम लागत में भी उल्लेखनीय कमी आती है जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि इस तकनीक से फसल सात से दस दिन पहले तैयार हो जाती है, जिससे किसानों को अगली फसल की तैयारी के लिए अतिरिक्त समय मिल जाता है। उन्होंने कहा कि निर्धारित लक्ष्य की पूर्ति के लिए राजकीय कृषि बीज गोदामों पर पर्याप्त मात्रा में बीज उपलब्ध करा दिए गए हैं।किसानों को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि डीएसआर तकनीक से बुवाई करते समय खरपतवार नियंत्रण पर विशेष ध्यान दें तथा समय से खरपतवारनाशी दवा पेंडीमेथालिन का छिड़काव अवश्य करें। प्रारंभिक अवस्था में खेत अपेक्षाकृत सूखा रहने के कारण खरपतवार उगने की संभावना अधिक रहती है।कृषि विभाग ने किसानों से आधुनिक तकनीकों को अपनाकर जल संरक्षण के साथ अधिक उत्पादन प्राप्त करने का आह्वान किया है।



