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बड़ा मंगलवार: “धर्म हमारे लिए आस्था, उनके लिए राजनीति”— अखिलेश यादव ने खुद बांटा भंडारे का प्रसाद, उमड़ा जनसैलाब

​​बड़ा मंगलवार: “धर्म हमारे लिए आस्था, उनके लिए राजनीति”— अखिलेश यादव ने खुद बांटा भंडारे का प्रसाद, उमड़ा जनसैलाब

लखनऊ: बड़े मंगलवार के पावन अवसर पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी का एक अलग ही रूप देखने को मिला। अमूमन राजनीति की व्यस्तताओं में घिरे रहने वाले अखिलेश जी ने आज पूरी श्रद्धा और सादगी के साथ आम जनता के बीच पहुंचकर अपने हाथों से भंडारे का प्रसाद वितरित किया। इसे ही सच्ची आस्था, अटूट विश्वास और जनता का भरोसा कहते हैं।

दिखावे से दूर, कर्म और संकल्प में विश्वास

समाजवादी पार्टी की परंपरा हमेशा से हर धर्म का सम्मान करने की रही है। अखिलेश जी ने कभी भी अपनी धार्मिक आस्था का राजनीतिकरण नहीं किया और न ही इसे वोट बटोरने का जरिया बनाया। बहुत कम लोग जानते हैं कि अखिलेश जी नियम से मंगलवार का व्रत रखते हैं, लेकिन उन्होंने कभी इस नाम पर वोट नहीं मांगे।

​”समाजवादियों के लिए धर्म अंतरात्मा की आवाज और विशुद्ध आस्था है, जबकि भाजपा के लिए यह सिर्फ और सिर्फ राजनीति करने का एक माध्यम है।”

वरिष्ठ नेताओं की गरिमामयी उपस्थिति

​इस पावन अवसर पर अखिलेश जी के साथ समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता श्री राजेंद्र चौधरी जी और लखनऊ के लोकप्रिय विधायक श्री रविदास मेहरोत्रा जी भी मुख्य रूप से उपस्थित रहे। सभी नेताओं ने जनता के बीच बैठकर प्रसाद ग्रहण किया और लखनऊ की इस ऐतिहासिक ‘बड़े मंगलवार’ की गंगा-जमुनी तहजीब को आगे बढ़ाया।

​सच्ची आस्था: धर्म का दिखावा किए बिना जनता की सेवा।
​बड़ा फर्क: सपा के लिए धर्म ‘आस्था’ है, विपक्ष के लिए ‘एजेंडा’।
​सादगी: वीआईपी कल्चर से दूर, खुद अपने हाथों से जनता को प्रसाद देना।

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