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लखनऊ हाईकोर्ट ने दिया आदेश- रात 10 बजे के बाद तेज शोर रोकें अफसर, तय सीमा से अधिक शोर न हो

लखनऊ हाईकोर्ट ने दिया आदेश- रात 10 बजे के बाद तेज शोर रोकें अफसर, तय सीमा से अधिक शोर न हो

अदालत ने सभी 18 मंडलों के कमिश्नर और सभी जिलाधिकारियों को आदेश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में पार्कों, खेल के मैदानों और खुली जगहों का सर्वे करें और उन्हें सरकारी सूची में शामिल करें।

हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने आम लोगों समेत बच्चों व बुजुर्गों को होने वाली असुविधा के मद्देनजर रात 10 बजे के बाद शादी, विवाह व अन्य समारोहों में होने वाले तेज शोर को सख्ती से रोकने के निर्देश अफसरों को दिए हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार, पुलिस, नगर निगम और एलडीए को इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत समुचित कार्रवाई करने को कहा है।

अदालत ने प्रदेश के सभी मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों  तथा प्राधिकरणों को निर्देश दिया है कि वे पार्कों, खेल के मैदानों और खुले स्थानों का विवरण तैयार कर उन्हें उत्तर प्रदेश पार्क, खेल मैदान और खुली जगह संरक्षण और विनियमन अधिनियम, 1975 के तहत तैयार की जाने वाली सरकारी सूची में शामिल करें। कोर्ट ने उन्हें ऐसे स्थानों का पूरा ब्यौरा प्रस्तुत करने का भी पेश करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने सभी 18 मंडलों के कमिश्नर और सभी जिलाधिकारियों को आदेश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में पार्कों, खेल के मैदानों और खुली जगहों का सर्वे करें और उन्हें सरकारी सूची में शामिल करें।न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने सोमवार को यह आदेश धर्मपाल यादव की जनहित याचिका पर दिया है। याची ने शहर के जनेश्वर मिश्रा पार्क के व्यावसायिक उपयोग पर रोक लगाने की मांग की है। सुनवाई के दौरान अदालत ने व्यावसायिक और सामाजिक गतिविधियों के दौरान तेज शोर होने की जन समस्या का भी संज्ञान लिया।  कहा कि अधिनियम की धारा 6 के अनुसार सूचीबद्ध पार्क, खेल के मैदान या खुले स्थानों का उपयोग, उस उद्देश्य के अलावा किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकता, जिसके लिए उनका उपयोग 1975 में अधिनियम लागू होने से ठीक पहले किया जा रहा था, जब तक कि इसके लिए निर्धारित प्राधिकरण से पूर्व अनुमति न ली जाए।पार्कों में व्यावसायिक गतिविधियों पर पुनर्विचार करे एलडीए : हाईकोर्टहाईकोर्ट ने लखनऊ विकास प्राधिकरण को कहा है कि जनेश्वर मिश्र पार्क समेत अन्य पार्कों, खेल के मैदानों, खुली जगहों का उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए करने पर पुनर्विचार करें। अदालत ने टिप्पणी की कि पार्क में रहने वाले पक्षियों और अन्य जीवों पर ऐसी गतिविधियों का बुरा असर पड़ता है और यह पर्यावरण के लिए भी ठीक नहीं है। साथ ही अदालत ने खास तौर पर शहर के रिहायशी इलाकों समेत पार्कों में आयोजित होने वाले समारोहों में तय सीमा से अधिक शोर होने पर प्रभावी अंकुश लगाने का निर्देश दिया है।

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