सलेमपुर बघाई : 25 अप्रैल को चंद्रशेखर आज़ाद इंटर कॉलेज के मैदान में होगा सद्भावना सम्मेलन

25 अप्रैल को चंद्रशेखर आज़ाद इंटर कॉलेज के मैदान में होगा सद्भावना सम्मेलन
चौरासी के चक्कर से बचना अर्थात जन्म और मृत्यु के चक्र से बचने का उपाय संत बताते है- महात्मा सत्यबोधानंद जी

सलेमपुर बघाई, 24 अप्रैल। अखिल भारतीय आध्यात्मिक और सामाजिक संस्था मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान और डॉ. संतोष कुमार यादव जी के सौजन्य से सलेमपुर बघाई में आयोजित सात दिवसीय ‘श्रीमद् भागवत सद्भावना सत्संग ज्ञानयज्ञ’ के पांचवे दिन विभिन्न तीर्थं स्थलों से पधारे अनेक ज्ञानी संतों ने अपने-अपने सत्संग विचार रखें।
संतों की महिमा पर उद्बोधन
कार्यक्रम के दौरान दिल्ली से पधारे मानव उत्थान सेवा समिति के केंद्रीय संगठन सचिव महात्मा सत्यबोधानंद जी ने संतों की महिमा पर जो स त्संग सुनाया, वह बहुत ही प्रेरणादायक था। उन्होंने बताया कि संत हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे हमें सही मार्ग दिखाते हैं, हमें आत्म-ज्ञान की ओर ले जाते हैं, और हमें जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने में मदद करते हैं।
उन्होंने बताया कि सच्चे संत हमें आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करते हैं, जिससे हम जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझ सकते हैं। संत हमें सही मार्ग दिखाते हैं, जिससे हम जीवन में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। संत हमें आत्म-ज्ञान की ओर ले जाते हैं, जिससे हम अपने आप को समझ सकते हैं। हमें शांति और सुख की ओर ले जाते हैं, जिससे हम जीवन में संतुष्टि प्राप्त कर सकते हैं।
चौरासी से बचने का उपाय
महात्मा जी ने बताया कि “चौरासी में चक्कर लगाने” का अर्थ है कि हमें जन्म और मृत्यु के चक्र में फंसने से बचना चाहिए। यह चक्र हमें बार-बार जन्म और मृत्यु की प्रक्रिया से गुजरने के लिए मजबूर करता है, जिससे हमें दुख और कष्ट होता है। इससे बचने का एकमात्र रास्ता समय से सच्चे ही बताते है। अगर हम अपने जीवन में सत्कर्म करते हैं, तो हम इस जन्म-मरण के चक्र से मुक्त हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमें अपने जीवन में सच्चाई, न्याय, और परोपकार की राह पर चलना चाहिए, जिससे हम इस चक्र से बच सकते हैं। अगर हम इन उपायों को अपनाते हैं, तो हम चौरासी में चक्कर लगाने से बच सकते हैं और अपने जीवन को सार्थक बना सकते हैं।
तीर्थनगरी नैमिषारण्य से आए हुए पूज्य महात्मा अपर्णा बाई जी ने बताया कि सत्संग की महिमा बहुत ही अनमोल है। सत्संग हमें आत्म-ज्ञान, शांति, और सुख की ओर ले जाता है। यह हमें जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने में मदद करता है और हमें सही मार्ग दिखाता है। सत्संग में हमें सच्चे संत मिलते है। सत्संग में हम आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त कर सकते है, जिससे हम जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझ सकते हैं। सत्संग हमें शांति और सुख की ओर ले जाता है, जिससे हम जीवन में संतुष्टि प्राप्त कर सकते हैं। सत्संग की महिमा को समझने के लिए, हमें नियमित रूप से सत्संग में जाना चाहिए और महात्माओं की वाणी को सुनना चाहिए। इससे हमें जीवन में सकारात्मकता और आत्मविश्वास बढ़ेगा।
संतों के अनुभव से समाज को लाभ:
सत्संग के दौरान श्रीराम जन्मभूमि अयोध्या धाम से पधारी पूज्य महात्मा दर्शनी बाई जी ने बताया कि संतों की महिमा को समझने के लिए हमें उनके चरणों में बैठना चाहिए और उनकी बातों को ध्यान से सुनना चाहिए। इससे हमें उनके ज्ञान और अनुभव से सर्व समाज को लाभ उठाने का अवसर मिलेगा।
संत का मिलना मतलब भगवान का मिलना
श्रीमदभागवत सद्भावना सम्मेलन के पांचवे दिन तीर्थंराज प्रयाग से पधारे पूज्य महात्मा सारथानंद जी ने संत के मिलने से भगवान की प्राप्ति होती है, संत हमें सर्व व्यापी भगवान की प्राप्ति के लिए मार्गदर्शन करते हैं और हमारे हृदय मंदिर के अंदर दर्शन कराते है। संत के मिलने से भगवान की प्राप्ति होती है, यह सभी धर्म शास्त्रों में अंकित है। इसलिए हमें संत की महिमा को समझना चाहिए और उनके मार्गदर्शन को अपनाना चाहिए।
25 अप्रैल को सद्भावना सम्मेलन में उमड़ेगा जन सैलाब, श्री विभु जी महाराज करेंगे सम्बोधित
महात्मा सारथानंद जी कहा कि 25 अप्रैल को शहीद चंद्रशेखर आज़ाद इंटर कॉलेज के मैदान में होने वाले सद्भावना सम्मेलन में अपार जन सैलाब उमड़ेगा। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में अध्यात्मवादी और युवाओं के पथ प्रदर्शक श्री विभु जी महाराज का उद्बोधन होगा।
विशेष
इस दौरान मंच पर फतेहपुर से महात्मा आत्मगीतानंद जी, अमेठी से महात्मा चंद्रकेशवानंद जी, लखीमपुर खीरी से महात्मा सत्यवती बाई जी, महात्मा कुंती बाई जी, प्रयागराज से महात्मा सुमना बाई जी, गाजीपुर से महात्मा दयावती बाई जी ने अपने आत्म कल्याणकारी प्रवचन से पांडाल में उपस्थित भक्तों को लाभान्वित किया।
हवन-पूजन व भंडारा:
यह सात दिवसीय ज्ञानयज्ञ के आज तीसरे दिन आरती पूजन व विशाल भंडारे के साथ कार्यक्रम को विश्राम किया गया। अनेक आचार्यजनों ने विधिवत मन्त्रोंच्चारण के साथ पूजन अर्चन किया। आयोजकों ने समस्त धर्मप्रेमी जनता से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर पुण्य लाभ अर्जित करने की अपील की है।
अतिथि स्वागत:
श्री रामाश्रय सिंह यादव, श्री अनिरुद्ध सिंह, झगरू प्रसाद, राजमंगल जी, डॉ. अनिल राय जी(ग्राम प्रधान) श्री संतोष कुमार मिश्रा(पूर्व ग्राम प्रधान), श्री रामकुँवर सिंह, देवनारायण यादव जी(पूर्व प्रधानाचार्य), घनश्याम पाण्डेय जी, रमेश यादव जी(ग्राम प्रधान), रामअवध यादव और समिति के शाखा कार्यकर्ता व मानव सेवा दल के अनेक स्वयंसेवक सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहें।
इस दौरान सुबह से शाम तक आचार्य सुनील पाण्डेय रेवती, आचार्य रजनीश उपाध्याय, पंडित अमन तिवारी, पंडित आशुतोष पाण्डेय, वेदाचार्य आशीष उपाध्याय, वेदविभूषण पंकज ओझा और गोलू मिश्रा ने वेद मन्त्रोंचारण के साथ विधिवत पूजा अर्चना की। मंचासीन सभी पूज्य संत-महात्मागणों का फूल-मालाओं से स्वागत किया गया। आरती-प्रसाद के साथ कार्यक्रम को विश्राम किया गया। तत्पश्चात् भोजन-भंडारे का सभी ने लाभ उठाया। मंच संचालन डॉ. संतोष कुमार यादव जी ने किया।



