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गोरखपुर : दोहरी नागरिकता प्रकरण पर 15 दिन की चुप्पीः थाना प्रभारी पर मामला दबाने के गंभीर आरोप

दोहरी नागरिकता प्रकरण पर 15 दिन की चुप्पीः थाना प्रभारी पर मामला दबाने के गंभीर आरोप

वायरल ऑडियो और विरोधाभासी बयान से बढ़ा विवाद, जीरो टॉलरेंस नीति पर उठे सवाल

गोरखपुर जनपद के बड़हलगंज थाना क्षेत्र में दोहरी नागरिकता से जुड़े एक संवेदनशील मामले को लेकर पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि थाना प्रभारी ने 15 दिन पूर्व दिए गए प्रार्थना पत्र के बावजूद न केवल मामले को दबाए रखा, बल्कि जनसुनवाई की पीली पर्ची देने से भी इनकार कर दिया। पीड़ित का कहना है कि उसने विधिवत शिकायत दर्ज कर जांच व कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन उसे केवल आश्वासन देकर टाल दिया गया।

शिकायतकर्ता के अनुसार, जब उसने मामले को गोरखपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) के समक्ष प्रस्तुत किया और थाना स्तर पर 15 दिन तक कार्रवाई न होने की बात उठाई, तब यह मामला प्रमुख अखबारों की सुर्खियों में आया। खबर प्रकाशित होने के बाद थाना प्रभारी ने मीडिया के समक्ष यह बयान दिया कि थाने पर इस तरह का कोई प्रार्थना पत्र प्राप्त ही नहीं हुआ है, और यदि शिकायत मिलती है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

इसी बीच एक कथित ऑडियो वायरल होने से विवाद और गहरा गया है। वायरल ऑडियो में यह संकेत मिलने का दावा किया जा रहा है कि थाना प्रभारी को 15 दिन पहले ही शिकायत पत्र मिल चुका था। ऐसे में मीडिया में दिए गए बयान और वायरल ऑडियो के बीच विरोधाभास ने पूरे प्रकरण को संदेह के घेरे में ला दिया है। हालांकि, ऑडियो की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि आरोप सही हैं, तो यह केवल एक थाना स्तर की लापरवाही नहीं बल्कि शासन की मंशा के विपरीत कार्य है। प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति, जो भ्रष्टाचार और लापरवाही के खिलाफ सख्त रुख का दावा करती है, इस प्रकरण में कमजोर पड़ती नजर आ रही है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मामला वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक तक पहुंच चुका है, तब भी अब तक कोई स्पष्ट जांच रिपोर्ट, कार्रवाई या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने क्यों नहीं आई। जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी इस पूरे मामले को और भी गंभीर बना रही है और इससे आमजन के बीच अविश्वास की स्थिति उत्पन्न हो रही है।

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि उच्च अधिकारी इस पूरे प्रकरण में क्या रुख अपनाते हैं और क्या निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई की जाती है या नहीं।

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