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सत्ता नहीं, संस्कार की है भाजपा की विकास यात्रा’, सीएम योगी आदित्यनाथ ने ली सेल्फी

सत्ता नहीं, संस्कार की है भाजपा की विकास यात्रा’, सीएम योगी आदित्यनाथ ने ली सेल्फी

भाजपा के स्थापना दिवस पर सभी कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री ने एक सोशल मीडिया संदेश में कहा कि भाजपा की विकास यात्रा सत्ता की नहीं, संस्कार की है। विस्तार की नहीं, विचार की है। ‘अंत्योदय से राष्ट्रोदय’ के संकल्प की सिद्धि की है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के स्थापना दिवस पर गोरखनाथ मंदिर परिसर स्थित हिंदू सेवाश्रम भवन की छत पर पार्टी का झंडा फहराया। इस अवसर पर उन्होंने झंडे के सम्मुख पार्टी पदाधिकारियों के साथ सेल्फी ली और सभी को स्थापना दिवस की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। भाजपा के स्थापना दिवस पर सभी कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री ने एक सोशल मीडिया संदेश में कहा कि भाजपा की विकास यात्रा सत्ता की नहीं, संस्कार की है। विस्तार की नहीं, विचार की है। ‘अंत्योदय से राष्ट्रोदय’ के संकल्प की सिद्धि की है।

गोरखनाथ मंदिर परिसर में पार्टी का झंडा फहराने के अवसर पर सांसद रविकिशन शुक्ल, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक विपिन सिंह, प्रदीप शुक्ल, नगर निगम के उप सभापति पवन त्रिपाठी, महानगर संयोजक राजेश गुप्ता, पार्षद दुर्गेश बजाज, जंगल कौड़िया के ब्लॉक प्रमुख बृजेश यादव, भरोहिया के ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि संजय सिंह समेत कई कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

भाजपा के स्थापना दिवस पर सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिये सीएम योगी ने कहा, ‘विश्व के सबसे विशाल राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस की सभी समर्पित कार्यकर्ताओं को हार्दिक बधाई। भाजपा मात्र एक राजनीतिक संरचना नहीं, बल्कि श्रद्धेय पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी और ‘भारत रत्न’ श्रद्धेय अटल जी के उदात्त लोकतांत्रिक आदर्शों एवं सात्विक सनातनी जीवन मूल्यों से अभिसिंचित एक जीवंत विचार परंपरा है।’

सीएम योगी ने अपने संदेश में लिखा, ‘राष्ट्र प्रथम की भावना से ओतप्रोत यह राष्ट्रवादी परिवार आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुका है, जो सेवा, संस्कार और समर्पण के संकल्प के साथ 145 करोड़ देश वासियों की आशाओं और आकांक्षाओं को निरंतर शक्ति दे रहा है। भाजपा की यह विकास यात्रा सत्ता की नहीं, संस्कार की है। विस्तार की नहीं, विचार की है। ‘अंत्योदय से राष्ट्रोदय’ के संकल्प की सिद्धि की है।’

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