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लखनऊ स्कूल, कॉलेज, क्लब व बार में सप्लाई करते थे ड्रग्स, पुलिस को मिली कोकीन-अफीम; पांच गिरफ्तार

लखनऊ स्कूल, कॉलेज, क्लब व बार में सप्लाई करते थे ड्रग्स, पुलिस को मिली कोकीन-अफीम; पांच गिरफ्तार

यूपी एसटीएफ ने चारबाग इलाके से दिल्ली और गोरखपुर से ड्रग्स लाकर लखनऊ के स्कूल, कॉलेज, क्लब और बार में सप्लाई करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पांच तस्करों को गिरफ्तार कर कोकीन, गांजा और अफीम बरामद की गई।

स्कूली छात्रों व समिट बिल्डिंग व डीएलएफ माईपैड के क्लब व बार में आने वाले युवाओं को कोकीन, गांजा, अफीम जैसे मादक पदार्थ (ड्रग्स) बेचने वाले पांच तस्करों को यूपी एसटीएफ ने चारबाग के पास से गिरफ्तार किया है।

आरोपी दिल्ली से मादक पदार्थ लेकर आते थे और उसको शहर के अलग-अलग स्कूल, कॉलेज के पास और क्लब में आने वाले युवकों को बेचते थे। एसटीएफ के डिप्टी एसपी दीपक सिंह से के अनुसार, एक विशेष टीम मादक पदार्थ तस्करों के खिलाफ कार्रवाई के लिए लगाई गई थी। सर्विलांस और मुखबिर की मदद से बृहस्पतिवार को चारबाग रेलवे स्टेशन के पास से पांच तस्करों के आने की सूचना मिली।

मौके से साउथ दिल्ली के महरौली निवासी राजकुमार उर्फ चिका, राजकुमार, हुसैनगंज निवासी सैय्यद दावर अलवी, गोरखपुर रामगढ़ ताल निवासी यश श्रीवास्तव और नाका निवासी प्रभजीत सिंह को गिरफ्तार किया।  आरोपियों के पास से 17 ग्राम कोकीन, दो किलो गांजा, 1.5 किलो अफीम व 200 ग्राम आर्गेनिक गांजा, आठ हजार रुपये नकद और पांच मोबाइल फोन मिले।

आठ से दस हजार रुपये प्रतिग्राम के हिसाब से बेचते थे

राजकुमार उर्फ चीका और राज कुमार ने बताया कि वह लोग नई दिल्ली से मादक पदार्थ लेकर आते हैं और यश श्रीवास्तव व प्रभजीत सिंह इसे जगह-जगह बेचते हैं।  विशेष रूप से कोकीन को यश व प्रभजीत लखनऊ के प्रतिष्ठित कॉन्वेंट स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को बेचते है, जिसमें अच्छा मुनाफा होता है। कोकीन आधे-आधे ग्राम की पुड़िया में बेची जाती है, जिससे स्कूल-कॉलेज के बच्चों पर कोई विपरीत प्रभाव न पड़े और कोई बीमार भी न हो। आरोपियों ने बताया कि वह लोग 8-10 हजार रुपये प्रति ग्राम के हिसाब से मादक पदार्थ बेचते हैं।

सप्लाई में बाउंसर, वेटर व स्टाफ की मिलीभगत

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि गैंग के सदस्य पहले चिह्नित स्थानों पर मिलते है, जिसका एक ड्रेस कोड भी होता है। यह लोग लखनऊ की नाइट क्लब, पब, बार में वहां के बाउंसर, वेटर व अन्य स्टाफ के माध्यम से ड्रग्स सप्लाई करते हैं। चूंकि ऐसी जगह पर बाउंसर, वेटर, स्टाफ की चेकिंग नहीं होती है इसलिए मादक पदार्थ बड़ी आसानी से अंदर चला जाता है।

खरीदारों की अलग लिस्ट

आरोपियों ने बताया कि वह तीन वर्ष से इस धंधे में हैं। उनके पास कस्टमरों की एक लिस्ट भी है, जिनको मेसेज के जरिये बात करके मांग और जरूरत के अनुसार मादक पदार्थ उपलब्ध कराए जाते हैं।

मददगारों को भी चिह्नित किया जा रहा

एसटीएफ के डिप्टी एसपी दीपक कुमार ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ हुसैनगंज थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। इस गैंग के लिए शहर में काम करने वाले मददगारों को भी चिह्नित किया जा रहा है। जल्द उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

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