सड़कों पर कूड़ा बीनने वाले कम उम्र के छोटे बच्चे नशे..

सड़कों पर कूड़ा बीनने वाले कम उम्र के छोटे बच्चे नशे..
सभ्यसमाज वे जिम्मेदार महकमें की नजर..
छोटे-छोटे मासूम से बच्चे, गंदे कपड़े, हाथ पैर मेले-कुचले, नन्हें कंधों पर स्कूली बैग की जगह कूड़ा कचरा उठाने वाला एक बोरा, बब्लगम की भांति मुँह से पॉलीथीन को फुलाते ये बच्चे जिंदगी को अभी से दांव पर लगाकर चलते हैं। पॉलिथिन को फुलाकर लड़खड़ाते ये बच्चे ऐसा नशा करते हैं जो इनको नारकीय जीवन की तरफ लेकर जा रहा है। यह एक प्रकार का गम्भीर नशा है जो सस्ता भी है अक्षरों को मिटाने वाला फ्लूड, इसे बच्चे पॉलिथीन में डालकर फुलाकर गहरी सांसें लेते हैं इससे नशा हो जाता है ये नशा नन्हें बच्चों का जीवन बर्बाद कर रहा है। सड़कों पर कूड़ा बीनने वाले कम उम्र के छोटे बच्चे इस नशे के आदि होते जा रहे हैं। बचपन कहीं खोता जा रहा है, किसी को चिंता नहीं है। बिखरे हुए नौनिहालों की फ्लूड बेचने वाले भी इस गोरखधंधो में लगे हुए है। बेचने वालों को इस बात की कतई चिंता नहीं है कि इन बच्चों का जीवन अंधकारमय होता जा रहा है। सवाल यह पैदा होता है कि आखिर इस बिखरते एवं टूटते बचपन की परवाह कौन करेगा? कहां है सम्बन्धित विभाग? कहाँ है समाजिक संगठन जो बच्चों के हित में कार्य करते हैं। ऐसे संगठनों को आगे आकर पहल करनी होगी अन्यथा नशे के आदी होते जा रहे ये छोटे-छोटे बच्चे अपने भविष्य की ऐसी गाथा लिखेंगे कि हमें पढ़ने में ये सुनने में भी दिक्कत होगी। देश का ये भविष्य यदि यूं ही नशे का आदी होकर आगे बढ़ता रहा तो कैसे राष्ट्र का निर्माण होगा? हमें आगे आकर पहल करनी चाहिए, हम अकेले भी इस काम को कर सकते हैं या फिर किसी संगठन संस्था से जुडकर ऐसा कर सकते हैं? हमारा छोटा सा एक प्रयास भी इन बच्चों में से किसी एक की किस्मत को बदल सकता है बातें सभी करते है लेकिन कुछ काम की बाते भी होनी चाहिए। ऐसी बातें जिन पर अमल किया जा सके। साथ ही मेरा सम्बन्धिात विभाग से भी आग्रह है कि फ्लूड – बेचने वालो के लिये कुछ कायदे कानून होने चाहिए। ताकि ऐसे बच्चे इन्हें न खरीद सके। ऐसे सामाजिक बुराइयों को दूर कर समाज के रूप को बेहतर एवं भविष्यमय बनाया जा सकता है। हमें समाज नही सोच बदलने की जरूरत है। यदि सोच बदलेगी तो समाज निश्चित – ही सुधार जायेगा। क्या हम अपनी सोच बदलेंगे
Balram Singh
India Now24



