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सोच और शरीर लड़की जैसा, हार्मोन के असंतुलन ने बदली जिंदगी की तस्वीर- लड़की में मिले XY क्रोमोसोम

सोच और शरीर लड़की जैसा, हार्मोन के असंतुलन ने बदली जिंदगी की तस्वीर- लड़की में मिले XY क्रोमोसोम

एम्स के एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के डॉ. देव आदित्य दास के अनुसार, जन्म के समय युवती का जैविक विकास पुरुष के रूप में होना चाहिए था। हार्मोनल गड़बड़ियों के कारण शरीर महिलाओं की तरह विकसित हुआ पर पीरियड्स और सामान्य यौवनावस्था विकसित नहीं हुई।

एम्स गोरखपुर में एक केस ने सभी को हैरान कर दिया है। एक युवती जो लड़कियों की तरह दिखती है और उसी तरह से सोचती है, पर हार्मोन के असंतुलन ने उसकी जिंदगी की तस्वीर बदल दी है। उसमें यौवनावस्था के कोई लक्षण विकसित नहीं हुए। न तो उसे मासिक धर्म आते हैं और न ही लड़कियों जैसा शारीरिक विकास हुआ है।जेनेटिक जांच में उसमें पुरुषों वाला क्रोमोसोम मिला। उसका इलाज कर रहे एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि इस बीमारी का नाम स्वियर सिंड्रोम है। यह जेनेटिक और दुर्लभ बीमारी है। एम्स के एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के डॉ. देव आदित्य दास के अनुसार, जन्म के समय लड़की का जैविक विकास पुरुष के रूप में होना चाहिए था।विज्ञापन

कुछ हार्मोनल गड़बड़ियों के कारण उसका शरीर महिलाओं की तरह विकसित तो हुआ पर उसमें पीरियड्स और सामान्य यौवनावस्था विकसित नहीं हुई। डॉ. देव के मुताबिक, जेनेटिक जांच में युवती में एक्स-वाई क्रोमोसोम मिला है, जो सामान्यत: लड़कों में पाया जाता है। फिलहाल उसका इलाज चल रहा है।

मासिक धर्म न शुरू होने पर माता-पिता ने डॉक्टर को दिखायाडॉ. दास के मुताबिक, युवती की उम्र 23 साल है। जब वह 16 साल की थी तो उसमें यौवनावस्था (प्यूबर्टी) के सामान्य लक्षण विकसित नहीं हुए और उसे पीरियड्स (मासिक धर्म) भी नहीं आ रहे थे। निजी अस्पतालों में दिखाने के बाद उसे पीरियड्स तो आने लगे पर इलाज बंद होते ही फिर पहले जैसी स्थिति हो गई।इसके बाद परिजन उसे लेकर एम्स पहुंचे। यहां डॉ. देव आदित्य दास के निर्देशन में उसका इलाज शुरू हुआ। डॉ. दास ने बताया कि युवती में प्राइमरी अमेनोरिया की समस्या थी यानी उसे स्वाभाविक रूप से मासिक धर्म नहीं हो रहे थे। उसकी लंबाई भी सामान्य लड़कियों की तुलना में थोड़ी अधिक है।

कैरियोटाइप टेस्ट में सामने आई दुर्लभ जेनेटिक बीमारीडॉ. दास ने बताया कि कैरियोटाइप एक विशेष प्रकार की आनुवंशिक जांच है, जिसमें किसी व्यक्ति की कोशिकाओं में गुणसूत्रों (क्रोमोसोम्स) की संख्या और संरचना की जांच की जाती है। युवती की जांच की गई तो उसमें एक्स-वाई क्रोमोसोम पैटर्न पाया गया, जो सामान्यतः लड़कों में होता है, जबकि लड़कियों में एक्स-एक्स पैटर्न होता है।गर्भधारण नहीं कर सकेगी युवतीडॉ. दास के अनुसार, युवती में बच्चेदानी मौजूद है लेकिन अंडाशय विकसित नहीं हुए। ऐसे मामलों में वह स्वाभाविक रूप से गर्भधारण नहीं कर सकती। उसके शरीर में आवश्यक बदलाव लाने के लिए हार्मोनल दवाइयां दी जाएंगी। ये दवाइयां उसे लंबे समय तक लेनी पड़ सकती हैं। इससे पीरियड्स शुरू होने और शारीरिक विकास में मदद मिलेगी।

इन बातों का रखें ध्यान ताकि भटकना न पड़े0- यदि 15-16 वर्ष की उम्र तक पीरियड्स शुरू न हों या लैंगिक विकास में देरी हो तो एंडोक्राइनोलॉजिस्ट से जांच कराना जरूरी है।0- कुछ मामलों में जेनेटिक कारण जुड़े हो सकते हैं। परिवार में ऐसी स्थितियां हों तो जेनेटिक काउंसलिंग मददगार हो सकती है।0- डॉक्टर की सलाह पर हार्मोन टेस्ट, अल्ट्रासाउंड/एमआरआई और कैरियोटाइप जांच कराई जा सकती है।

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