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लखनऊ जंक्शन पर ट्रेन के आते ही जगमगा उठेंगे प्लेटफॉर्म, एप से कंट्रोल होंगे उपकरण, 3 करोड़ का लगेगा सिस्टम

लखनऊ जंक्शन पर ट्रेन के आते ही जगमगा उठेंगे प्लेटफॉर्म, एप से कंट्रोल होंगे उपकरण, 3 करोड़ का लगेगा सिस्टम

इस सिस्टम को तीन करोड़ रुपये से 18 स्टेशनों पर लगाया जा रहा है। इस सिस्टम के तहत रात में प्लेटफॉर्म पर सिर्फ 30 प्रतिशत लाइटें ही जलेंगी। ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर एंट्री करते ही बाकी 70 प्रतिशत लाइटें भी स्वतः जल उठेंगी और ट्रेन के रवाना होते ही बंद हो जाएंगी।

ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल ने अनूठी पहल की है। अब लखनऊ जंक्शन समेत 18 स्टेशनों पर ट्रेन के आते ही प्लेटफॉर्म रोशनी से जगमगा उठेंगे और ट्रेन के जाते ही लाइटें खुद-ब-खुद बंद हो जाएंगी।
इस सिस्टम को नियंत्रित करने के लिए आईआर-नियंत्रक एप विकसित किया गया है, जिस पर लगभग तीन करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस सिस्टम के तहत रात में प्लेटफॉर्म पर सिर्फ 30 प्रतिशत लाइटें ही जलेंगी। ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर एंट्री करते ही बाकी 70 प्रतिशत लाइटें भी स्वतः जल उठेंगी और ट्रेन के रवाना होते ही बंद हो जाएंगी।

यह एप सेंसर आधारित है। रेलवे कंट्रोल रूम में बैठे कर्मचारी बिजली के उपकरणों को एप से नियंत्रित कर आपूर्ति शुरू या बंद कर सकेंगे। अधिकारियों के अनुसार, पहले चरण में लखनऊ जंक्शन, गोरखपुर जैसे प्रमुख स्टेशन व अमृत भारत योजना में पुनर्विकसित हो रहे स्टेशनों के नाम शामिल किए जाएंगे। दूसरे चरण में वाराणसी व इज्जतनगर मंडल के स्टेशनों पर इसे शुरू किया जा जाएंगे।पानी की टंकी भरने में भी होगा इस्तेमालएप आधारित सिस्टम से पानी की टंकियां भी भरी जाएंगी। टंकी भरते ही सेंसरों से कंट्रोलरूम को सूचना मिल जाएगी, जिसके बाद लाइट खुद बंद हो जाएगी। लिफ्ट व एस्केलेटर भी एप से नियंत्रित किए जाएंगे। बिजली खपत की मॉनीटरिंग भी होगी।रियल टाइम मॉनीटरिंग कर सकेगा रेलवेरेलवे अधिकारियों ने बताया कि यह एप रियल टाइम मॉनीटरिंग पर काम करेगा। सेंसर आधारित एप से रेलवे स्टेशन के उपकरणों को जोड़ा जाएगा, जिसे सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम्स के क्लाउड आधारित केंद्रीकृत सर्वर से लिंक किया जाएगा, जो सिर्फ एक क्लिक पर पूरी रिपोर्ट भी तैयार कर लेगा।लखनऊ मंडल के जनसंपर्क अधिकारी पूर्वोत्तर रेलवे महेश गुप्ता का कहना है कि ऊर्जा संरक्षण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सोलर पैनलों से बिजली पैदा करना हो या एप आधारित सिस्टम से बिजली की बचत, पूर्वोत्तर रेलवे ऐसी कोशिशें करता रहा है, जो आगे भी जारी रहेंगी।

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