यूपी विधानसभा चुनाव 2027: लोकसभा से सबक लेकर भाजपा का बड़ा फैसला, टिकट बंटवारे में सीएम योगी को मिला ‘फ्री हैंड’

यूपी विधानसभा चुनाव 2027: लोकसभा से सबक लेकर भाजपा का बड़ा फैसला, टिकट बंटवारे में सीएम योगी को मिला ‘फ्री हैंड’

लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों से सीख लेते हुए भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने उत्तर प्रदेश के आगामी 2027 विधानसभा चुनाव के लिए मास्टरस्ट्रोक खेला है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी आलाकमान ने यूपी में टिकट बंटवारे से लेकर पूरी चुनावी रणनीति तय करने की कमान सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों में सौंप दी है।
लोकसभा चुनाव से क्यों लिया सबक?
2024 के चुनाव से ठीक पहले सीएम योगी ने आलाकमान को 24 से अधिक सांसदों के टिकट काटकर नए चेहरों को मौका देने की सलाह दी थी। हालांकि, केंद्रीय नेतृत्व ने इस सिफारिश को दरकिनार करते हुए 64 में से 47 सांसदों को दोबारा मैदान में उतार दिया। इसका नतीजा यह हुआ कि 47 में से 26 सांसद चुनाव हार गए और भाजपा केवल 33 सीटों पर सिमट गई। इसी कारण केंद्र में पार्टी पूर्ण बहुमत से चूक गई, जिस पर आरएसएस (RSS) और पार्टी के भीतर भी सवाल उठे थे।
कैसे होगा टिकटों का फैसला?
कोर कमेटी का गठन: टिकट बंटवारे के लिए एक कोर कमेटी बनाई जाएगी, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष, संगठन महामंत्री, आरएसएस के क्षेत्र प्रचारक और दोनों उपमुख्यमंत्री (केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक) उम्मीदवारों पर विचार करेंगे। हालांकि, अंतिम मुहर सीएम योगी की ही होगी।
गठबंधन का फैसला दिल्ली से: अपना दल (एस), आरएलडी, निषाद पार्टी और सुभासपा जैसे सहयोगी दलों के साथ सीट शेयरिंग पर अंतिम फैसला केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा।
नया तालमेल: बेहतर समन्वय के लिए सीएम योगी के साथ अच्छे संबंध रखने वाले विनोद तावड़े को यूपी का नया प्रदेश प्रभारी बनाया गया है।
एमएलसी चुनाव और बगावत रोकने का ‘प्लाएन-बी’
एमएलसी चुनाव में कड़ा पैमाना: विधान परिषद (शिक्षक-स्नातक) की 11 सीटों के चुनाव की कमान भी सीएम योगी के पास है। उन्होंने साफ कर दिया है कि जिस दावेदार ने जितने ज्यादा वोटर बनवाए हैं, टिकट का हकदार वही होगा। वाराणसी (शिक्षक व स्नातक) और प्रयागराज-झांसी सीटों को सपा से वापस छीनना उनका मुख्य लक्ष्य है।
बगावत रोकने को सीट बदलने का फॉर्मूला: भाजपा के आंतरिक सर्वे में 190 से 205 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। टिकट कटने पर विधायकों के सपा, कांग्रेस या बसपा में जाने के डर को देखते हुए पार्टी ‘सीट बदलने’ की रणनीति अपनाएगी। जिन विधायकों के खिलाफ विरोधी माहौल है, उन्हें टिकट काटने के बजाय दूसरी सुरक्षित सीटों पर भेजा जाएगा।



