जखनियां (गाजीपुर) : जखनियां ब्लॉक में मनरेगा के कामों पर उठे सवाल, श्रमिकों की संख्या और धरातल की हकीकत पर ग्रामीणों ने मांगा जवाब

जखनियां ब्लॉक में मनरेगा के कामों पर उठे सवाल, श्रमिकों की संख्या और धरातल की हकीकत पर ग्रामीणों ने मांगा जवाब
जखनियां (गाजीपुर)। जखनियां विकासखंड की लगभग ग्राम पंचायतों में मनरेगा सहित विभिन्न विकास योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। खासकर मनरेगा में काम कर रहे श्रमिकों की संख्या और सरकारी अभिलेखों में प्रदर्शित श्रमिकों की संख्या को लेकर ग्रामीणों ने पारदर्शिता की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि कई स्थानों पर कार्यस्थल पर मौजूद श्रमिकों की वास्तविक संख्या और दर्ज संख्या में अंतर होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
ग्रामीणों के बीच यह भी चर्चा है कि मनरेगा के कार्यों की जांच के दौरान मौके पर अधिकारियों द्वारा जो स्थिति देखी जाती है, उसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं होने से तरह-तरह के सवाल खड़े होते हैं। लोगों का कहना है कि यदि किसी ग्राम पंचायत में जांच के लिए अधिकारी मौके पर पहुंचते हैं तो जांच में कितने श्रमिक मिले, कितना कार्य पूर्ण पाया गया, कितनी कमियां सामने आईं और किन बिंदुओं पर सुधार के निर्देश दिए गए—इसकी जानकारी ग्राम पंचायत स्तर पर सार्वजनिक की जानी चाहिए।
अधिकारियों की निगरानी पर भी उठ रहे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा में श्रमिकों की ऑनलाइन उपस्थिति, कार्यस्थल की वास्तविक स्थिति और भुगतान से संबंधित प्रक्रिया की नियमित एवं निष्पक्ष जांच जरूरी है। यदि कहीं अभिलेखों में अधिक श्रमिक दर्शाए जा रहे हैं और मौके पर संख्या कम मिलती है तो इसकी जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। वहीं यदि अभिलेख और मौके की स्थिति सही है तो विभाग को तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
ग्रामीणों का आरोप है कि योजनाओं की निगरानी में अधिकारियों की कथित उदासीनता से अनियमितताओं को बढ़ावा मिलने की आशंका रहती है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
ग्राम पंचायतों में जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि मनरेगा के प्रत्येक कार्य की मौके पर जांच कर उसकी रिपोर्ट ग्राम पंचायत में सार्वजनिक की जाए। कार्यस्थल पर स्वीकृत श्रमिकों की संख्या, वास्तविक उपस्थिति, कराए गए कार्य की मात्रा, खर्च की गई धनराशि तथा जांच में मिली कमियों का विवरण सार्वजनिक होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना पर रोक लगाई जा सकेगी।ग्रामीणों का सीधा सवाल है कि यदि जांच होती है तो उसकी रिपोर्ट जनता के सामने कब आएगी और जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी में मनरेगा के कार्यों की वास्तविक स्थिति क्या है? अब देखना यह है कि संबंधित विभाग इन सवालों पर क्या जवाब देता है और जमीनी स्तर पर मनरेगा कार्यों की जांच कब कराता है।



