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‘घूस’ के ‘लिफाफों’ से ‘मानकों’ की ‘अनदेखी’ और खड़ी होती रहीं बहुमंजिला ‘इमारतें’

‘घूस’ के ‘लिफाफों’ से ‘मानकों’ की ‘अनदेखी’ और खड़ी होती रहीं बहुमंजिला ‘इमारतें’

जिला मुख्यालय सहित कस्बों में बिल्डिंग बाइलाज की उड़ाई गईं धज्जियां!

बुलेटचौराहा, कलक्टरगंज, बाकरगंज, आबूनगर, हरिहरगंज, बस स्टाप क्षेत्रों में खड़ी हैं बहुमंजिला इमारतें!

ज्यादातर इमारतों में प्रवेश व निकास का अलग द्वार नहीं और संचालित हैं होटल,नर्सिंग होम!

फायर फाइटिंग सिस्टम,फायर अलार्म,स्मोक डिटेक्टर एवं ऊंचाई के मानकों की भी की गई अनदेखी!

ना सेडबैक ना पार्किंग और ना ही छोड़ा ओपेन एरिया!

लखनऊ के अलीगंज में आग की खाक में मिले बच्चों की घटना के बाद शासन की टूटी तंद्रा!

मनमानी करने वाले
अधिकारियों,कर्मचारियों सहित भवन स्वामियों पर नहीं होती कार्रवाई

लखनऊ के अलीगंज में एक कोचिंग सेंटर में लगी आग के बाद जल कर खाक हुए 15बच्चों की कुर्बानी ने एक बार फिर सरकार की तंद्रा तोड़ी है।अब कोचिंग सेंटरों,व्यावसायिक भवनों,नर्सिंग होमों की जांच पड़ताल की जा रही है। हकीकत में बनने वाली बहुमंजिला व्यावसायिक इमारतों के मानकों की अनदेखी के पीछे घूस के मिलने वाले मोटे लिफाफे बड़ी वजह हैं जो जिम्मेदारों को अपने कर्तव्यों से मुंह मोड़े रखते हैं।फतेहपुर जिला भी इससे अछूता नहीं है।मानकों की धज्जियां उड़ा जिस तरह से भीड़-भाड़ वाले इलाकों में बिल्डिंग बाइलाज एवं फायर के मानकों को अनदेखा कर निर्माण कराया गया *ये इमारतें अघोषित दुर्घटना की शिकार कब हो जाएं जिम्मेदारों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है?
जिला मुख्यालय सहित खागा,बिंदकी,मलवां,हथगांम,जहानाबाद,औंग,चौडगरा आदि कस्बों में बहुमंजिला इमारतों के निर्माण में मानकों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं।शहर क्षेत्र के ही बुलेट चौराहा,हरिहरगंज,कलक्टरगंज,बाकरगंज,रोडवेज बस स्टॉप,आबूनगर आदि क्षेत्रों में बनकर तैयार और निर्माणाधीन इमारतें इसकी गवाह हैं कि किस तरह से बिल्डिंग बाइलाज सहित अग्निशमन के मानकों की धज्जियां उड़ाई गईं।इमारत में निर्धारित क्षेत्रफल का 35 से 40 फ़ीसदी का क्षेत्रफल खुला होना चाहिए और उसके साथ ही सेडबैक और पार्किंग की व्यवस्था अवश्य होनी चाहिए लेकिन इन सबके ना होने के बावजूद उनके नक्शे पास होते रहे और इमारतें खड़ी होती चली गईं।
बिल्डिंग का बाईलाज यह कहता है कि वेंटीलेटेड कॉरिडोर,चौड़ी सीढ़ियां,पैनिक बटन और एंट्री व एग्जिट अलग होनी चाहिए।राष्ट्रीय भवन संहिता(एनबीसी)के तहत व्यवसायिक भवन के एक मंजिल की ऊंचाई 12 से 15फीट के अलावा फायर फाइटिंग सिस्टम,स्प्रिंकलर सिस्टम,फायर अलार्म,स्मोक डिटेक्टर,फायर हाइड्रेंट होना जरूरी है। इतना ही नहीं अग्नि शमन के सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाने वाले व्यवसायिक भवनों ने फायर एनओसी तक लेना मुनासिब नहीं समझा। इतना ही नहीं इन बहुमंजिला इमारतों में अलग-अलग प्रतिष्ठान मानकों की अनदेखी करके खुल गए।दिखाने के लिए अग्निशमन के सिलेंडर लगा दिए गए लेकिन उनकी क्रियाशीलता क्या है?यह अपने-अपने बड़ा सवाल है! अब जब एक के बाद एक आग की घटनाएं जानलेवा हो चली हैं तो इनकी पड़ताल शुरू की गई है लेकिन सवाल यह उठता है कि इन इमारतों का नक्शा कैसे पास हुआ?फायर एनओसी एवं बिल्डिंग के मनको की अनदेखी क्यों की गई? इसे किसी ने देखा क्यों नहीं?बात सीधी और सपाट है कि मानकों की अनदेखी करने के पीछे भवन स्वामियों द्वारा घूस के दिए गए मोटे लिफाफे बड़ा कारण हैं।अब देखना यह है कि जिला प्रशासन ऐसे गैर जिम्मेदार अधिकारियों,कर्मचारियों एवं मानकविहीन भवनों के स्वामियों पर क्या कार्रवाई करता है?

Balram Singh
India Now24

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