गोरखपुर/बड़हलगंज गिरवी जेवर गलाने का मामला गरमाया, सपा सांसद ने पीड़ित को न्याय दिलाने का किया दावा

गोरखपुर/बड़हलगंज गिरवी जेवर गलाने का मामला गरमाया, सपा सांसद ने पीड़ित को न्याय दिलाने का किया दावा
बड़हलगंज। क्षेत्र के पिड़हनी निवासी सत्येंद्र साहनी के कथित रूप से गिरवी रखे गए सोने के आभूषण बिना अनुमति गलाने का मामला अब राजनीतिक रंग लेने लगा है। शुक्रवार को सुल्तानपुर के सपा सांसद रामभुआल निषाद बड़हलगंज पहुंचे और पत्रकार वार्ता कर पीड़ित के समर्थन में न्याय की लड़ाई लड़ने की बात कही।सांसद रामभुआल निषाद ने कहा कि किसी व्यक्ति के गिरवी रखे गए आभूषण को उसकी अनुमति के बिना गलाना गंभीर अपराध है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में पीडीए समाज का उत्पीड़न हो रहा है। साथ ही उन्होंने क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों पर अपने करीबी सराफा कारोबारी को बचाने की कोशिश करने और पुलिस जांच में बाधा डालने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी और निषाद समाज पीड़ित सत्येंद्र साहनी के साथ खड़ा है। सांसद ने संबंधित सराफा कारोबारी से आभूषण वापस करने की अपील करते हुए चेतावनी दी कि ऐसा नहीं होने पर आंदोलन जारी रखा जाएगा।
दो साल बाद जेवर लेने पहुंचे तो मिली जानकारीपत्रकार वार्ता में सांसद ने बताया कि सत्येंद्र साहनी के भाई साहब साहनी ने जरूरत के समय एक सोने की चेन और अंगूठी गिरवी रखी थी। बाद में जब रुपये की व्यवस्था होने पर वह वापस लेने पहुंचे तो पहले उन्हें टालमटोल का सामना करना पड़ा और बाद में बताया गया कि जेवर गलाए जा चुके हैं। इस दौरान सहकारी बैंक के पूर्व चेयरमैन और सपा नेता रामदरश विद्यार्थी ने भी पूरे मामले की जानकारी दी। पत्रकार वार्ता में पीड़ित सत्येंद्र साहनी समेत भुवनेश्वर चतुर्वेदी, अमरजीत यादव, सीताराम यादव, रामचंद्र सोनकर, अमीर यादव, डबलू पांडेय, बबलू यादव, राणा सिंह, सुदर्शन यादव और रमाशंकर सोनकर सहित बड़ी संख्या में सपा कार्यकर्ता मौजूद रहे।
सराफा कारोबारी ने आरोपों को बताया राजनीति से प्रेरितमामले में पुलिस ने सराफा कारोबारी श्रीकांत सोनी और उनके पुत्र के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं उद्योग व्यापार मंडल अध्यक्ष एवं सराफा कारोबारी श्रीकांत सोनी ने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि संबंधित व्यक्ति ने आभूषण गिरवी नहीं रखे थे, बल्कि उन्हें बेचा था। इसके बदले तत्कालीन बाजार भाव के अनुसार भुगतान किया गया था और खरीद का जीएसटी बिल भी जारी किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले को तथ्यों से हटाकर राजनीतिक रूप देने की कोशिश की जा रही है।



