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यूपी पंचायत चुनाव की बड़ी खबर, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने को गलत ठहराया, इलेक्शन की टाइमलाइन मांगी

यूपी पंचायत चुनाव की बड़ी खबर, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने को गलत ठहराया, इलेक्शन की टाइमलाइन मांगी

उत्तर प्रदेश त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को टालने और ग्राम प्रधानों को छह महीने के लिए प्रशासकों की नियुक्ति को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सही नहीं माना है. अदालत ने ओबीसी रिपोर्ट के साथ टाइमलाइन भी मांगी है.

प्रयागराज:यूपी में पंचायत चुनाव से जुड़ी बड़ी खबर आई है. इलाहाबाद हाईकोर्ट में ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने को चुनौती देने वाली याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई हुई. हाईकोर्ट ने कहा कि प्रधानों को प्रशासक रूप में बने रहने की इजाजत नहीं दी जा सकती. अदालत ने पंचायत चुनाव टालने को असंवैधानिक बताया है. कोर्ट ने सरकार से OBC रिपोर्ट के साथ टाइमलाइन मांगी है. हालांकि कोर्ट ने अभी किसी तरह की कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई है.कोर्ट ने कहा कि प्रशासक नियुक्त करना डिवीजन बेंच के आदेश का उल्लंघन है जो अदालत की अवमानना की श्रेणी में आता है.

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अंतिम अवसर के रूप में ओबीसी आयोग की रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर लाने के लिए एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया.कोर्ट ने कहा कि अगर राज्य सरकार ने कोई आयोग गठित किया है तो उसकी जानकारी और अन्य विवरण कोर्ट में दाखिल करें. इसमें चुनाव होने की समय सीमा स्पष्ट रूप से बताई गई हो प्रस्तुत करें. सहारनपुर से याचिकाकर्ता अरविंद राठौर की ओर से दाखिल की गई याचिका पर अदालत ने ये निर्देश दिया.

13 जुलाई को दोपहर दो बजे मामले की अगली सुनवाई होगी.यूपी में पंचायतों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो गया है.25 मई को सरकार ने आदेश जारी कर ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त कर दिया है.याचिका में प्रशासकों को हटाकर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराए जाने की मांग की गई है. जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की सिंगल बेंच में मामले की सुनवाई हुई.

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