जिलाधिकारी द्वारा गठित जांच टीम ने किया स्थलीय निरीक्षण

सादात (गाजीपुर) सादात नगर पंचायत के वार्ड नौ में स्थित करीब 90 साल (निर्माण वर्ष 1937) पुराने अनुदानित संस्कृत महाविद्यालय के भवन को बीते 16 सितंबर को प्रशासन द्वारा गिरवाकर विद्यालय की भूमि पर नगर पंचायत कार्यालय बनाये जाने के मामले की जांच करने के लिए अपर जिलाधिकारी (भू.रा.) सुनील त्रिवेदी और सैदपुर एसडीएम सुश्री ज्योति चौरसिया रविवार को सादात पहुंचे।
जिलाधिकारी द्वारा गठित जांच टीम ने स्थलीय निरीक्षण करते हुए संस्कृत महाविद्यालय के प्रबंधक योगेश्वर प्रसाद और आसपास के निवासियों से पूछताछ किया। प्रबंधक योगेश्वर प्रसाद ने संस्कृत महाविद्यालय से जुड़े आवश्यक कागजात प्रस्तुत किए। वहीं नगर निवासी शिवानन्द सिंह मुन्ना, ससना निवासी विजेन्द्र प्रताप सिंह, हरदिया ग्रामवासी ब्रजनाथ उर्फ साधु यादव, पूर्व प्रधानाचार्य रामधनी शर्मा, सुदामा राम विश्वकर्मा, बैकुंठ सिंह, मनीष यादव, प्रदीप सिंह, अंजनी कुमार, उमेश सिंह, पलकधारी राजभर सहित अन्य लोगों ने जांच अधिकारियों को बताया कि जिस भूमि पर नगर पंचायत का नया कार्यालय भवन बनाया जा रहा है, वहां बीते कई दशकों से संस्कृत महाविद्यालय संचालित है। प्रबंधक द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य और ग्रामीणों के बयान को संकलित कर जांच अधिकारियों ने इसकी रिपोर्ट जिलाधिकारी को प्रेषित करने की बात कही।
उल्लेखनीय है कि इस चर्चित मामले को गंभीरता से लेते हुए भाजपा जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश राय और वरिष्ठ भाजपा नेता सच्चिदानंद सिंह ने भी शनिवार को यहां पहुंचकर स्थलीय निरीक्षण किया था। जिलाध्यक्ष ने मौके पर मौजूद जखनियां के नायब तहसीलदार विवेकानंद सिंह और हल्का लेखपाल से आवश्यक जानकारी लेते हुए संस्कृत महाविद्यालय की भूमि पर नगर पंचायत सादात का कार्यालय बनाए जाने का विरोध किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में सनातन संस्कृति की भाषा संस्कृत महाविद्यालय की भूमि को सुरक्षित करने की बात कही।
बता दें कि, सादात नगर पंचायत के वार्ड नौ में बना संस्कृत महाविद्यालय स्व. रामशरण राम ने वर्ष 1937 में बनवाया था। यह भूखंड आबादी में आता था, जिस पर सरकार द्वारा अनुदानित यह संस्कृत विद्यालय चलता रहा। संस्कृत महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य हामिद सिद्दीकी और प्रबंधक योगेश्वर प्रसाद ने बताया कि वर्तमान समय विद्यालय में छात्र भी पंजीकृत हैं। उन्होंने बताया कि नगर पंचायत सादात प्रशासन द्वारा किए जा रहे इस अवैध निर्माण को लेकर न्यायालय में याचिका भी दाखिल की गई है। वहीं, शासनादेश के मुताबिक श्रेणी 6-2 की भूमि पर जिसका कब्जा होगा, उसका स्वामित्व कब्जेदार में होता है। नियमानुसार जमींदारी उन्मूलन से पहले की भूमि पर जिसका कब्जा होगा उस भूमि का स्वामित्व उसी व्यक्ति में निहित होगा। यही नहीं उत्तर प्रदेश के पूर्व के मुख्य सचिव दुर्गा शंकर पांडेय, सुधीर गर्ग जैसे मुख्य सचिव ने पूर्व में स्पष्ट आदेश भी दिया है कि यदि मामला कोर्ट में विचाराधीन हो तो प्रशासनिक हस्तक्षेप नहीं किया जाय। इन सबके बावजूद बीते 16 सितंबर को जखनियां के एसडीएम अतुल कुमार ने मौके पर उपस्थित होकर कार्यदाई संस्था सीएनडीएस के अभियंता अभिलाष पाण्डेय और ठेकेदार राकेश सिंह को निर्माण संबंधी कार्य कराने हेतु निर्देशित किया। एसडीएम के आदेश के बाद संस्कृत महाविद्यालय की चहारदीवारी और कमरों को जमींदोज कर दिया गया था।



