World IBD DAY 19th MAY

World IBD DAY 19th MAY
आंतों की सूजन संबंधी रोगों को समझना— समग्र स्वास्थ्य,संतुलित जीवनशैली और होम्योपैथिक दृष्टिकोण
डा• रूप कुमार बनर्जी
होमियोपैथिक चिकित्सक
मानव शरीर का स्वास्थ्य केवल बाहरी शक्ति से नहीं, बल्कि भीतर की पाचन शक्ति, मानसिक संतुलन और प्रतिरक्षा क्षमता से निर्धारित होता है। जब हमारी आंतें स्वस्थ रहती हैं, तब शरीर पोषण को सही प्रकार ग्रहण करता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रहती है और मन भी संतुलित रहता है। किंतु आधुनिक जीवनशैली, तनाव, अनियमित भोजन, रसायनयुक्त खाद्य पदार्थ और मानसिक दबाव के कारण आज आंतों से जुड़ी बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं।
इन्हीं गंभीर रोगों में एक महत्वपूर्ण समूह है — IBD (Inflammatory Bowel Disease) अर्थात आंतों की सूजन संबंधी दीर्घकालिक बीमारियाँ।
विश्व स्तर पर प्रत्येक वर्ष 19 मई को World IBD Day मनाकर लोगों को इस रोग के प्रति जागरूक किया जाता है।
यह केवल पेट दर्द या दस्त की सामान्य समस्या नहीं है, बल्कि एक ऐसी अवस्था है जो धीरे-धीरे पूरे शरीर, मानसिक स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है।
आइए आज आपके साथ चर्चा करते हैं कि IBD क्या है?
IBD अर्थात Inflammatory Bowel Disease आंतों में लंबे समय तक रहने वाली सूजन की बीमारी है। इसमें मुख्यतः दो प्रमुख रोग शामिल होते हैं —
✓1. क्रोहन रोग (Crohn’s Disease)–
——————————————————
यह रोग मुख से लेकर गुदा तक पाचन तंत्र के किसी भी भाग को प्रभावित कर सकता है। सूजन आंतों की गहरी परतों तक पहुंच जाती है। इसके प्रमुख लक्षण लगातार पेट दर्द, बार-बार दस्त,वजन कम होना,कमजोरी और थकान,मल में खून,भूख कम लगना और हल्का बुखार है।
✓ 2. अल्सरेटिव कोलाइटिस (Ulcerative Colitis)–
———————————————————————-
यह बड़ी आंत (Colon) और मलाशय में सूजन तथा घाव उत्पन्न करता है। इसके प्रमुख लक्षण खूनयुक्त दस्त,पेट में मरोड़,बार-बार शौच की इच्छा,एनीमिया, कमजोरी
तथा निर्जलीकरण है।
IBD से जुड़ी अन्य गंभीर समस्याएँ–
*******************************
यदि रोग लंबे समय तक बना रहे तो शरीर के अन्य अंग भी प्रभावित हो सकते हैं।संभावित जटिलताएँ एनीमिया, कुपोषण,शरीर में कमजोरी,जोड़ो का दर्द,त्वचा रोग,आंखों में सूजन,लीवर संबंधी विकार,मानसिक तनाव और अवसाद, आंतों में छिद्र या रुकावट और पाचन तंत्र से जुड़ी अन्य बढ़ती बीमारियाँ हो सकती है।आज केवल IBD ही नहीं, बल्कि अनेक पाचन विकार तेजी से बढ़ रहे हैं —
प्रमुख पाचन रोग:
✓ IBS (Irritable Bowel Syndrome)
✓ Gastritis
✓ Acidity
✓ Fatty Liver
✓ कब्ज (Chronic Constipation)
✓ बवासीर (Piles)
✓ फिशर एवं फिस्टुला
✓ भोजन एलर्जी
✓ आंतों के संक्रमण
✓ गैस एवं अपच आदि। इन सभी समस्याओं का सीधा संबंध भोजन, मानसिक तनाव और प्रतिरक्षा असंतुलन से देखा जा रहा है।
IBD होने के संभावित कारण–
**************************
आज भी इसका पूर्ण कारण स्पष्ट नहीं है, परंतु निम्न कारकों को महत्वपूर्ण माना जाता है —
✔ प्रतिरक्षा प्रणाली की असामान्य प्रतिक्रिया
✔ आनुवंशिक प्रवृत्ति
✔ मानसिक तनाव
✔ जंक फूड और प्रोसेस्ड भोजन
✔ धूम्रपान एवं शराब
✔ एंटीबायोटिक का अत्यधिक उपयोग
✔ आंतों के सूक्ष्म जीवों का असंतुलन
✔ प्रदूषण एवं रसायनयुक्त खाद्य पदार्थ
आधुनिक जीवनशैली और बीमारियों का बढ़ता जाल–
*********************************************
आज भोजन का प्राकृतिक स्वरूप तेजी से बदल रहा है। डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ, अत्यधिक मसाले, कृत्रिम रंग, ठंडे पेय, फास्ट फूड और अनियमित दिनचर्या धीरे-धीरे पाचन शक्ति को कमजोर करते हैं।
देर रात जागना, मोबाइल और स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग, मानसिक तनाव, चिंता और प्रतिस्पर्धा की जीवनशैली भी आंतों की कार्यप्रणाली को प्रभावित करती है। यही कारण है कि पहले जो रोग वृद्धावस्था में दिखाई देते थे, वे अब युवाओं और बच्चों में भी बढ़ रहे हैं।
होम्योपैथिक दृष्टिकोण — रोग नहीं, रोगी का उपचार
*******************************************
होम्योपैथी के अनुसार रोग केवल शरीर के किसी अंग में उत्पन्न विकार नहीं, बल्कि सम्पूर्ण जीवनशक्ति (Vital Force) के असंतुलन का परिणाम है।इसलिए उपचार केवल सूजन या दर्द को दबाने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि रोगी की शारीरिक अवस्था,मानसिक स्थिति,भावनात्मक प्रकृति, खान-पान,नींद,तनाव और प्रतिरक्षा क्षमता,इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर किया जाता है।होम्योपैथी का उद्देश्य शरीर की स्वाभाविक रोग प्रतिरोधक क्षमता को संतुलित करना है।
IBD एवं पाचन रोगों में प्रयुक्त कुछ प्रमुख होम्योपैथिक औषधियाँ
*************************************************
✓✓( किसी भी औषधि का सेवन योग्य चिकित्सक के परामर्श से ही करें)
Mercurius Corrosivus,Aloe Socotrina, Arsenicum Album, Nux Vomica, Podophyllum, Phosphorus, Lycopodium, Carbo Veg, Colocynth, Jalapa, Gambojia इत्यादि इत्यादि।
आहार और दिनचर्या —क्या करें?
*****************************
✔ हल्का और सुपाच्य भोजन लें
✔ ताजे फल और उबली सब्जियाँ लें
✔ हल्के तेल घी में बना हुआ भोजन करें शाकाहार अपनाएं, मांसाहार से यथासंभव परहेज करें
✔ पर्याप्त पानी पिएं
✔ समय पर भोजन करें
✔ योग एवं प्राणायाम करें
✔ पर्याप्त नींद लें
✔ सकारात्मक सोच विकसित करें
किन चीजों से बचें?
******************
✘ अत्यधिक मसाले
✘ फास्ट फूड, जंक फूड, स्ट्रीट फूड इत्यादि
✘ बाहर होटल से मंगवा कर खाना
✘ धूम्रपान एवं शराब
✘ देर रात भोजन
✘ तनाव एवं चिंता
✘ अत्यधिक चाय-कॉफी
मानसिक स्वास्थ्य का विशेष महत्व–
******************************
IBD केवल शारीरिक रोग नहीं है। लगातार दर्द, कमजोरी और बार-बार शौच जाने की समस्या व्यक्ति को मानसिक रूप से भी प्रभावित करती है।कई रोगियों में चिंता,अवसाद,सामाजिक संकोच,आत्मविश्वास की कमी जैसी समस्याएँ विकसित हो सकती हैं।ऐसे में परिवार का सहयोग, सकारात्मक वातावरण और भावनात्मक समर्थन अत्यंत आवश्यक है।
IBD से पीड़ित व्यक्ति बाहर से सामान्य दिखाई दे सकता है, लेकिन भीतर वह लगातार संघर्ष कर रहा होता है। इसलिए ऐसे रोगियों के प्रति संवेदनशीलता, समझ और सहयोग आवश्यक है।समय पर जांच, संतुलित आहार, उचित चिकित्सकीय सलाह और स्वस्थ जीवनशैली द्वारा इस रोग को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
विश्व IBD दिवस हमें यह सिखाता है कि हमारा पाचन तंत्र केवल भोजन पचाने का माध्यम नहीं, बल्कि सम्पूर्ण स्वास्थ्य का आधार है।जब आंतें स्वस्थ रहती हैं, तब शरीर, मन और प्रतिरक्षा प्रणाली संतुलित रहती है। आधुनिक जीवनशैली के इस दौर में प्राकृतिक भोजन, मानसिक शांति, संतुलित दिनचर्या और समग्र चिकित्सा दृष्टिकोण अपनाना अत्यंत आवश्यक हो गया है।
होम्योपैथी, संतुलित आहार, योग, मानसिक शांति और चिकित्सकीय परामर्श के समन्वय से IBD रोगी भी स्वस्थ, सक्रिय और संतुलित जीवन जी सकते हैं।
।।स्वस्थ आंतें ही स्वस्थ जीवन की आधारशिला हैं।।



