अब्दुल्लाह आज़म ख़ान प्रकरण में निष्पक्ष न्याय की अपील

अब्दुल्लाह आज़म ख़ान प्रकरण में निष्पक्ष न्याय की अपील
पूर्व विधायक अरशद खान ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को एक मार्मिक संवैधानिक पत्र भेज कर लगाई न्याय की गुहार
लखनऊ। मोहम्मद आज़म खान व अब्दुल्लाह आज़म ख़ान से जुड़े मामलों को लेकर मोहम्मद अरशद खान ने भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश को एक मार्मिक संवैधानिक पत्र प्रेषित कर निष्पक्ष न्याय, संवैधानिक संरक्षण एवं मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील की है।
उन्होंने अपने पत्र में कहा कि भारत में लंबे समय तक विद्यालयों में जन्मतिथि दर्ज करने की प्रक्रिया अत्यंत अनौपचारिक रही है, जहाँ अनेक मामलों में जन्मतिथि विद्यालय स्तर पर अनुमान अथवा स्थानीय अभिलेखों के आधार पर दर्ज की जाती रही। इसी पृष्ठभूमि में अब्दुल्लाह आज़म ख़ान की जन्मतिथि संबंधी विवाद उत्पन्न हुआ, जिसके आधार पर बाद में दस्तावेज़ तैयार हुए।
मोहम्मद अरशद खान ने कहा कि वर्ष 2017 में जन्मतिथि संशोधन के उपरांत संबंधित दस्तावेज़ों को पुनः अद्यतन कराया गया। उनका कहना है कि न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत विभिन्न अभिलेखों और तथ्यों पर व्यापक संवैधानिक दृष्टि से विचार किया जाना आवश्यक है, ताकि न्याय प्रक्रिया पर जनता का विश्वास और अधिक सुदृढ़ हो।
उन्होंने कहा: “यह विषय केवल व्यक्तियों का नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र, न्यायिक निष्पक्षता और संविधान की आत्मा से जुड़ा प्रश्न है।
लोकतंत्र में न्याय का आधार निष्पक्ष सुनवाई, संवैधानिक मर्यादा और मानवीय संवेदनशीलता है।
अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा कि मोहम्मद आज़म खान उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक महत्वपूर्ण नाम रहे हैं।
वे अनेक बार विधायक, सांसद, मंत्री तथा नेता प्रतिपक्ष जैसे महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक पदों पर रह चुके हैं। उनका सार्वजनिक जीवन सामाजिक न्याय, लोकतांत्रिक संघर्ष और सर्वधर्म समभाव की राजनीति से जुड़ा रहा है।
मोहम्मद अरशद खान ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में किसी भी राजनीतिक व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई पूर्णतः निष्पक्ष, पारदर्शी और संवैधानिक मर्यादाओं के अनुरूप होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका पर देश की जनता का विश्वास सर्वोपरि है और प्रत्येक मामले में सभी पक्षों एवं साक्ष्यों का संतुलित परीक्षण लोकतंत्र को मजबूत करता है।
प्रेस विज्ञप्ति में यह भी घोषणा की गई कि 17 मई 2026 को प्रातः 10 बजे लोकतंत्र, संविधान और सामाजिक न्याय के समर्थन में एक शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक धरना आयोजित किया जाएगा, जिसमें देशभर से सामाजिक कार्यकर्ता, लोकतांत्रिक संगठनों के प्रतिनिधि एवं नागरिक भाग लेंगे।
धरना प्रदर्शन के उपरांत एक प्रतिनिधिमंडल महामहिम राष्ट्रपति महोदया और चीफ जस्टिस आफ इंडिया सुप्रीम कोर्ट से भेंट कर पूरे प्रकरण से अवगत कराने का प्रयास करेगा तथा न्याय एवं संवैधानिक संरक्षण की मांग करेगा।
अंत में मोहम्मद अरशद खान ने कहा इतिहास प्रत्येक संवैधानिक निर्णय को दर्ज करता है। न्याय, निष्पक्षता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा ही भारतीय लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति है।



