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सादात (गाजीपुर) : संस्थापक की विरासत और प्रबंध समिति विवाद फिर चर्चा में

संस्थापक की विरासत और प्रबंध समिति विवाद फिर चर्चा में

क्षेत्र के बच्चों की शिक्षा के लिए स्थापित किया था बापू इंटर कॉलेज, आज भी उनके आदर्श लोगों के लिए प्रेरणा

सादात (गाजीपुर)। बापू इंटर कॉलेज, सादात के संस्थापक स्वर्गीय प्रभु नारायण सिंह अपनी देशभक्ति, सादगी, विनम्रता, क्षमाशीलता और कर्मठ व्यक्तित्व के लिए आज भी क्षेत्र में श्रद्धा और सम्मान के साथ याद किए जाते है।

वर्ष 1914 में जमींदार सुवच्चन सिंह के घर जन्मे प्रभु नारायण सिंह बचपन से ही मेधावी थे। प्राथमिक शिक्षा गांव में प्राप्त करने के बाद उन्होंने टीडी कॉलेज, जौनपुर से इंटरमीडिएट तक की शिक्षा ग्रहण की। वे समाजवादी विचारधारा से प्रभावित थे और डॉ. राममनोहर लोहिया को अपना आदर्श मानते थे। साथ ही वे पूर्व सांसद विश्वनाथ गहमरी के अभिन्न मित्रों में शामिल थे।

30 बीघा भूमि दान कर रखी शिक्षा की नींव

आजादी के बाद सादात क्षेत्र में जूनियर कक्षा से आगे की शिक्षा के लिए कोई विद्यालय नहीं था। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए छात्रों को सैदपुर, गाजीपुर, वाराणसी, जौनपुर और आजमगढ़ जैसे शहरों का रुख करना पड़ता था। क्षेत्र के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रभु नारायण सिंह ने वर्ष 1949 में बापू इंटर कॉलेज की स्थापना की और इसके लिए अपनी 30 बीघा भूमि दान कर दी।क्षेत्र में शिक्षा की ज्योति जलाने का श्रेय प्रभु नारायण सिंह को ही जाता है।

वर्ष 1969 में किसी कारणवश उन्होंने बापू इंटर कॉलेज से त्यागपत्र दे दिया।

पर आज विद्यालय प्रबंध समिति विवाद फिर चर्चा में

इधर, संस्थापक के पुत्र राजेश कुमार सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि उनके पिता ने जिस उद्देश्य से विद्यालय की नींव रखी थी, वर्तमान में विद्यालय का संचालन उस मूल उद्देश्य और विचारधारा के विपरीत हो रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रबंध समिति न तो संस्थापक परिवार से जुड़ी है और न ही मूल सदस्य रही है। इसी कारण उन्हें प्रबंध समिति के खिलाफ न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।

उन्होंने बताया कि प्रबंध समिति से संबंधित मामला

उपजिलाधिकारी जखनियां न्यायालय में विचाराधीन है, जबकि इसी बीच विद्यालय में प्रबंध समिति का चुनाव कराया जा रहा है।
इस संबंध में जिला विद्यालय निरीक्षक प्रकाश सिंह ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में है और नोटिस भी प्राप्त हुई है, लेकिन यदि चुनाव प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है तो उसे तत्काल रोका नहीं जा सकता। चुनाव परिणाम के बाद उत्पन्न परिस्थितियों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, उपजिलाधिकारी जखनियां ने भी इसी प्रकार की बात दोहराते हुए कहा कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है और नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

अब क्षेत्र की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शिक्षा की अलख जगाने वाले प्रभु नारायण सिंह के आदर्शों, उनके मूल उद्देश्य और विद्यालय की प्रबंध व्यवस्था को लेकर चल रही यह लड़ाई आगे किस दिशा में जाती है। इसका जवाब आने वाला समय ही देगा।

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