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डीडीओ कोड नियमों में बदलाव से शिक्षकों का रुका वेतन

डीडीओ कोड नियमों में बदलाव से शिक्षकों का रुका वेतन

– शिक्षकों और कर्मचारियों ने दी आंदोलन की चेतावनी

– जून माह का वेतन अब तक नहीं मिलने से शिक्षकों और कर्मचारियों में नाराजगी।

उच्च शिक्षा निदेशक और लुआक्टा ने पुरानी व्यवस्था से वेतन जारी करने की मांग की।

– 15 जुलाई को प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा और विशेष सचिव वित्त को सौंपा गया था ज्ञापन।

– लुआक्टा ने चेताया, जल्द वेतन न मिला तो प्रदेशभर में आंदोलन होगा।

सहायता प्राप्त अशासकीय अनुदानित कॉलेजों व अनुदानित विश्वविद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों को जून माह का वेतन अब तक नहीं मिलने से प्रदेशभर में नाराजगी बढ़ गई है।

उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय और लखनऊ विश्वविद्यालय सहयुक्त महाविद्यालय शिक्षक महासंघ (लुआक्टा) ने चेतावनी दी है कि

यदि शीघ्र वेतन जारी नहीं हुआ तो शिक्षक और कर्मचारी आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

लुआक्टा के अध्यक्ष डॉ. मनोज पांडेय और महामंत्री *डॉ. अंशु केडिया* ने बताया कि शासन ने 3 जून के शासनादेश के जरिए क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों के अधीन आने वाले सहायता प्राप्त महाविद्यालयों और अनुदानित विश्वविद्यालयों के लिए पुराने डीडीओ (ड्राइंग एंड डिस्बर्सिंग

ऑफिसर) कोड समाप्त कर नई व्यवस्था लागू की थी।

इसके तहत प्रत्येक संस्थान के लिए कोषागार स्तर पर नया चार अंकों का कोड आवंटित किया जाना है।

इसी प्रक्रिया में आई प्रशासनिक दिक्कतों के कारण जून का वेतन अटक गया है।

उन्होंने बताया कि समस्या को देखते हुए उच्च शिक्षा निदेशक ने एक जुलाई को शासन से अनुरोध किया था कि नई व्यवस्था पूरी तरह लागू होने तक जून माह का वेतन पुरानी प्रणाली से जारी किया जाए।

*प्रमुख सचिव को अवगत कराया था*

लुआक्टा ने प्रमुख सचिव, उच्च शिक्षा को पत्र भेजकर यही मांग की थी।

संगठन का कहना है कि वेतन में देरी से शिक्षकों और कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

कई कर्मचारियों को गृह ऋण और अन्य ईएमआई जमा करने में कठिनाई हो रही है तथा विलंब शुल्क भी देना पड़ रहा है।

लुआक्टा के प्रतिनिधिमंडल ने 15 जुलाई को प्रमुख सचिव, उच्च शिक्षा और विशेष सचिव, वित्त से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा था।

संगठन के अनुसार शासन ने 17 जुलाई तक समाधान का आश्वासन दिया था।

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