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कोरोनावायरस के मामले बढ़ने से क्या धीमी पड़ जाएगी शेयर बाजारों की रफ्तार, विशेषज्ञों से जानिए

देशभर में कोरोनावायरस के नए मामलों में वृद्धि के आंकड़े हम सभी को डरा रहे हैं। हाल में एक दिन में कोविड-19 से संक्रमण के एक लाख से ज्यादा नए मामले मिलने के बाद सोमवार को शेयर बाजार बुरी तरह लुढ़क गए।

नई दिल्ली,देशभर में कोरोनावायरस के नए मामलों में वृद्धि के आंकड़े हम सभी को डरा रहे हैं। हाल में एक दिन में कोविड-19 से संक्रमण के एक लाख से ज्यादा नए मामले मिलने के बाद सोमवार को शेयर बाजार बुरी तरह लुढ़क गए। एक साल पहले भी कोविड-19 संक्रमण और लॉकडाउन की वजह से शेयर बाजारों में जबरदस्त करेक्शन देखने को मिला था। मंगलवार को भी शेयर बाजारों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। ऐसे में निवेशकों के लिए यह जानना काफी महत्वपूर्ण है कि आने वाले दिनों में शेयर बाजारों का क्या हाल रहेगा। सीएनआई रिसर्च के सीएमडी किशोर ओस्तवाल ने कहा कि कोविड-19 के नए मामलों में बढ़ोत्तरी के बावजूद शेयर बाजार बहुत अच्छा रहेगा। उन्होंने कहा कि इस समय भारत में मार्केट को कोविड-19 से कोई लेनादेना नहीं है।

उन्होंने कहा कि कोविड-19 से जुड़े नए प्रतिबंध लोगों के लिए हैं। औद्योगिक कंपनियों के लिए कोई लॉकडाउन नहीं है। उन्होंने कि उत्पादन जारी रहेगा। इसके अलावा बांग्लादेश, ब्राजील और श्रीलंका जैसे देश मुश्किल वक्त से जूझ रहे हैं। इस वजह से भारत को फायदा मिलने की उम्मीद है।

ओस्तवाल ने कहा कि QIB (Qualified Institutional Buyer) लगातार निवेश कर रहे हैं। इससे बाजार ऊपर रहेगा। अब बॉन्ड यील्ड को लेकर भी बाजार पर कोई असर नहीं देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि घरेलू बाजार कंपनियों की कमाई के आधार पर आगे बढ़ते हैं और भारत में कंपनियों की आमदनी पर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि चौथी तिमाही में कंपनियों की कमाई के आंकड़े अच्छे आएंगे। इससे शेयर बाजार में अच्छी तेजी आएगी।

SMC Global के वाइस प्रेसिडेंट सौरभ जैन ने कहा, ”पिछले साल भी जब कोविड-19 ने रफ्तार पकड़ी थी तो इस बात का संदेश गया था कि इकोनॉमी रूक गई है। कई जगहों पर लॉकडाउन लागू है। लेकिन जैसे-जैसे प्रोत्साहन उपाय सरकार और आरबीआई द्वारा किए गए, तो मार्केट में लिक्विडिटी आई। इससे बाजार को मजबूती मिली।”

उन्होंने कहा कि मुख्य रूप से शेयर बाजार कंपनियों की आमदनी के आधार पर आगे बढ़ती हैं। पिछले साल छोटी कंपनियों ने संघर्ष किया और उन्हें समय लगा। लेकिन बड़ी कंपनियों को केवल लॉकडाउन के समय दिक्कत हुई। अनलॉक शुरू होती ही, उनके कारोबार में तेजी देखने को मिली।

जैन ने कहा कि इस ट्रेंड से यह पता चलता है कि इन परिस्थितियों के अनुकूल ढलने वाली ऐसी बड़ी कंपनियां जो आईटी को अपना रही हैं, नए इनोवेशन कर रही हैं, वहां पर काम ठीक है। उन्होंने कहा, ”अब भी लॉकडाउन से थोड़ी समस्या होगी हमारी इकोनॉमी में लेकिन स्टॉक मार्केट में जो स्टॉक होते हैं, वे पूरी देश की इकोनॉमी की तस्वीर नहीं दिखाती हैं। मेरे ख्याल से एक साल में सभी ने सीख लिया है कि कोविड-19 जैसी परिस्थितियों से कैसे डील करना है।”

उन्होंने कहा कि पिछले साल जिन लोगों ने नीचे में स्टॉक बेचा है। उन्होंने ये देख लिया है कि अचानक घबराकर शेयर बेच देने का कोई फायदा नहीं है क्योंकि आखिरकार मार्केट में तेजी आनी ही है। क्योंकि लिक्विडिटी जारी है। प्रोत्साहन जारी है।

वैल्यू रिसर्च में सीईओ धीरेंद्र कुमार ने इन दोनों से इतर विचार रखे। उन्होंने कहा कि मार्केट में इसको लेकर रिएक्शन दिखना शुरू हो गया है। बकौल कुमार कोविड-19 के बढ़ते मामलों के चलते बाजार नर्वस हो गया है। इसकी वजह यह भी है कि बाजार इस समय ऊंचे स्तर पर है। बाजार में जब तेजी रहती है तो ऐसी खबरों से लोगों में घबराहट होती है।

उन्होंने कहा कि कोविड-19 के मामलों में वृद्धि से पहले हमें केवल अच्छी खबरें मिल रही थीं। अचानक मामलों में तेजी से और लॉकडाउन लगने से और खासकर मुंबई में लॉकडाउन लगने से चीजें थोड़ी बदली हैं। इसकी वजह है कि मुंबई में काफी अधिक बिजनेस होता है और वहां लॉकडाउन लगने से ज्यादा असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि बाजार से जुड़ी सकारात्मक चीजों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि लोग ये मानते हैं कि कोविड-19 अस्थायी है लेकिन अचानक मामलों में वृद्धि से थोड़ी घबराहट देखने को मिली है।

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