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Varanasi-धर्मनगरी काशी में कोरोनाकाल के दौरान बढ़ी मिट्टी के घड़ों की डिमांड!Indianow24

धर्मनगरी काशी में कोरोनाकाल के दौरान बढ़ी मिट्टी के घड़ों की डिमांड!

वाराणसी से
डिस्ट्रिक्ट रिपोर्टर
रविंद्र सिंह की रिपोर्ट:
IndiaNow24!

वाराणसी: आधुनिक संसार में मशीनों ने कुछ ऐसा साथ दिया कि देश के लोगों ने अपनी संस्कृति को ही भुला दिया, लेकिन इस कोरोना काल (Corona Pandemic) ने उसी संस्कृति व परंपरा को वापस ला दिया है। हम बात कर रहे हैं गर्मी के दिनों में इस्तेमाल में आने वाली मिट्टी के घड़ों की जिसका शीतल जल गर्मी के दिनों में बहुत ज्यादा राहत देता था व इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं था।
धर्मनगरी वाराणसी (Varanasi) में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है, जहां मिट्टी के घड़ों को खरीदने के लिए लाइन लगी हुई है। खास बात यह है कि मार्केट में संक्रमण से बचाने वाले घड़े भी मिलने लगे हैं।

दुकानों पर लगी भीड़

लॉकडाउन में छूट के बाद मार्केट में सभी आवश्यकता के सामान लगभग मिलने लगे, लेकिन इस दौरान जिन दुकानों पर गिने चुने लोग आते थे, आज वहां रोजाना भीड़ लगी हुई है। यह दुकान है मिट्टी के घड़ों की। घड़े खरीदने के लिए ग्राहकों की भीड़ लगी है। कुम्हार व दुकानदार रितेश प्रजापति का बोलना है कि भिन्न-भिन्न डिजाइन में इन घड़ों की एक अच्छाई भी है, यह घड़े पूरी तरह से संक्रमण को रोकने में मदद करेंगे। इन घड़ों में बकायदा नल लगाया गया है, जिससे घड़े के अंदर बिना हाथ डाले आप नल द्वारा पानी लेकर पी सकते हैं। नल लगे हुए भिन्न-भिन्न डिजाइन में यह घड़ें जनता को बहुत ज्यादा पसंद आ रहे हैं।

फ्रिज के पानी से दूरी

उत्तर हिंदुस्तान में गर्मी ने अपना प्रचंड रूप दिखाना प्रारम्भ कर दिया है। आलम यह है कि पारा 46 डिग्री के पार पहुंच चुका है। वाराणसी की स्थिति कुछ ऐसी ही बनी हुई है। लिहाजा कोरोना वायरस की वजह से फ्रिज के पानी से दूर रहने की विवशता है। आयुष विभाग भी गर्म पानी पीने की सलाह दे रहा है, ताकि इम्युनिटी मजबूत हो। इसी वजह से लोग मिट्टी के घड़ों की तरफ रुख करने के लिए विवश हुए। लोग इस भीषण गर्मी में ठंडा पानी पीने के लिए इन घड़ों को खरीद रहे हैं। लोगों का बोलना है इस संक्रमण के इस दौर में फ्रिज का पानी पीने के लिए मना किया गया है, इसलिए हम मिट्टी के घड़ों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

भले ही इस कोरोनावायरस के कारण कई व्यवसाय को घाटा पहुंचा हो लेकिन कुम्हारों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है। गर्मी के दिनों में मिट्टी के घड़ों की इस बार बढ़ी डिमांड उन कुम्हारों कुम्हार के घरों में राहत जरूर पहुंचाया है जिनके घर गर्मी के मार के साथ-साथ आर्थिक मार भी झेला करते थे।