
ब्यूरो रिपोर्ट गाजीपुर।
आज दिनांक।24/01/026को
UGC के प्रस्तावित ड्राफ्ट रेगुलेशन को लेकर एकपक्षीय होने का आरोप, सामाजिक असंतुलन की आशंका जताई
जखनियां/गाज़ीपुर।विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा प्रस्तावित ड्राफ्ट रेगुलेशन/नए नियमों को लेकर छात्रों एवं समाज के एक वर्ग में असंतोष देखने को मिल रहा है। इस संबंध में वरिष्ठ समाजसेवी काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी के पूर्व छात्र विजय सिंह, लाठी, ने इस प्रकरण को लेकर कहा कि प्रस्तावित नियम उच्च शिक्षा व्यवस्था में असमानता एवं भेदभाव को बढ़ावा देने वाले प्रतीत होते हैं तथा इनके कारण विशेष रूप से सवर्ण वर्ग के छात्रों के शैक्षणिक एवं व्यावसायिक भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।बिजय सिंह ने कहा कि शिक्षा नीति का उद्देश्य सभी वर्गों को समान अवसर प्रदान करना होना चाहिए, न कि किसी एक वर्ग को लाभ पहुंचाकर दूसरे वर्ग के अधिकारों को सीमित करना। यदि नीतियां एकपक्षीय होंगी, तो इससे दीर्घकाल में सामाजिक विभाजन एवं आपसी वैमनस्य की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। साथ ही उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि ऐसे प्रावधानों के चलते SC/ST/OBC वर्ग के छात्र भी अनजाने में अन्य वर्गों से टकराव की स्थिति में आ सकते हैं, जो सामाजिक समरसता के लिए उचित नहीं है।उनके द्वारा यह भी चिंता व्यक्त की गई कि नीति निर्धारण एवं निर्णय समितियों में सामाजिक संतुलन और विविध प्रतिनिधित्व का अभाव दिखाई देता है, जिससे ड्राफ्ट रेगुलेशन की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं। भारत का संविधान समानता, प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय की भावना पर आधारित है, ऐसे में किसी भी नीति निर्माण प्रक्रिया का समावेशी एवं बहुवर्गीय होना आवश्यक बताया गया है।समाजसेवी द्वारा मांग की गई है कि UGC के प्रस्तावित एकपक्षीय ड्राफ्ट रेगुलेशन को तत्काल प्रभाव से रोका जाए, सभी वर्गों के छात्रों के लिए मेरिट, समान अवसर एवं निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए, तथा नई नीति लागू करने से पूर्व छात्रों, शिक्षकों, शिक्षाविदों एवं राज्य सरकारों से व्यापक संवाद किया जाए।अंत में समाजसेवी द्वारा यह विश्वास व्यक्त किया गया है कि संबंधित प्राधिकारी देश के युवाओं के भविष्य, सामाजिक समरसता एवं संवैधानिक मूल्यों की रक्षा हेतु शीघ्र एवं न्यायसंगत हस्तक्षेप करेंगे।



