Breaking Newsसंसार

भारत के छोटे शहरों से डॉक्टर बनने का सपना ले कर गए छात्र फंसे WAR में , आखिर छात्रों ने यूक्रेन को ही क्यों चुना ?

रूस और यूक्रेन के बीच जंग जारी है और हो सकता है कि कुछ घंटों में वह राजधानी कीव पर कब्जा भी कर ले। हालांकि, इस जंग से सभी की अपनी तक्लीफें हैं। जैसे कि वहां रह रहे अपने नागरिकों की सुरक्षा

भारत के लिए अभी सबसे बड़ी चिंता यह ही है कि अपने लोगों को वहां से कैसे निकाला जाए इसके लिए केंद्र सरकार लगातार कई मोर्चों पर काम कर रही है और अब आखिरकार यूक्रेन से सटे देशों से भारतीयों और उनमें भी जो छात्र वहां फंसे हुए हैं, उनको प्राथमिकता पर बाहर निकाला जा रहा है शनिवार शाम तक एक फ्लाइट भी भारतीय मेडिकल छात्रों को वापस लेकर मुंबई उतरेगी हालांकि, यहां सवाल यह है कि देश के छोटे शहरों से निकले बच्चों ने अपना डॉक्टर बनने का सपना पूरा करने के लिए यूक्रेन ही क्यों चुना?

बताया जाता है कि भारत में निजी कॉलेजों की फीस इतनी ज्यादा है कि यहां के माता-पिता अपने बच्चों को पढ़ाई के लिए यूक्रेन भेजने का फैसला लेते हैं। भारत के 20 हजार से ज्यादा छात्र यूक्रेन में हैं। वहां जारी जंग को देखते हुए माता-पिताओं की चिंता बढ़ी हुई है.

रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन में एक मेडिकल डिग्री की कीमत (छह साल के कोर्स के लिए) 15-17 लाख रुपये है, जो कि भारत में निजी मेडिकल कॉलेजों की तुलना में कम है। छात्र कई बैकग्राउंड से आते हैं, जिसमें खुद डॉक्टरों के बच्चे भी हैं.

रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के एक दिन बाद, भारत सरकार ने शुक्रवार को एक एडवाइजरी जारी की, जिसमें भारतीय नागरिकों को हंगरी और रोमानिया के साथ लगती यूक्रेनी सीमाओं पर जाने के लिए कहा है। लेकिन अपने-अपने विश्वविद्यालयों में बंद, यूक्रेन के विभिन्न शहरों में हजारों भारतीय छात्रों का कहना है कि जब तक उनके पास सुरक्षित पारगमन न हो, वे सीमा तक यात्रा करने का जोखिम नहीं उठा सकते। बता दें कि छात्र वहां से निकाले जाने के लिए लगातार पोस्ट कर रहे हैं.

जानकारी के मुताबिक, यूक्रेन की ओर भारतीय छात्रों का रुख करीब एक दशक पहले से शुरू हुआ था। कोलकाता में एस्पायरिंग लाइफ नाम की एक निजी कंसल्टेंसी फर्म चलाने वाले मनीष जायसवाल ने कहा, ‘निजी भारतीय ठेकेदारों ने यूक्रेन में विश्वविद्यालयों के साथ करार किया और उन्हें भारत में बहुत से ऐसे छात्र मिले जो विदेश जाना चाहते थे।’ बताया गया कि भारत में माता-पिता छात्रों को यूक्रेन भेजना चाहते हैं। शायद उनके लिए भारत में ज्यादा फीस देना बड़ी बात न हो, लेकिन उनके लिए यूक्रेन में बच्चों को पढ़ाना बड़ी बात है। वहां के सरकारी विश्वविद्यालय विश्व स्तर पर अपनी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए जाने जाते हैं। यूक्रेन में लगभग 16 चिकित्सा विश्वविद्यालय हैं जो भारतीय छात्रों के बीच लोकप्रिय हैं.

वहीं, रूस से एमबीबीएस पूरा करने वाले एसजीआरआर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल हेल्थ साइंसेज और एसएमआई अस्पताल (देहरादून) में , रेडियोलॉजी के सहायक प्रोफेसर और सलाहकार, डॉ सौरभ सच्चर कहते हैं, ‘यह एक अनुचित धारणा है कि विदेशों में सभी कॉलेज सस्ते हैं।’ उन्होनें कहा कि यह छात्रों पर निर्भर करता है कि छात्र कैसी पढ़ाई कर रहे हैं। ये देश उन्नत हैं और वहां के कॉलेज डब्ल्यूएचओ और भारतीय नियामक निकायों द्वारा मान्यता प्राप्त और अनुमोदित हैं। इन कॉलेजों में प्रवेश लेने से पहले, हमें वहां नामांकन के लिए भारतीय चिकित्सा परिषद (अब राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग) से अनुमति लेनी होगी.

उन्होंने कहा कि यूक्रेन और रूस जैसे देशों में कॉलेज सरकारी कॉलेज हैं, जहां प्रबंधन विदेशी छात्रों के लिए कुछ सीटें अलग रखता है। ये भारत के निजी कॉलेजों से सस्ते हैं.

Related Articles

Back to top button