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विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष

विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष

वैश्विक ताप चरम पर आज
समग्र सृष्टि का हो सम्मान ।
प्रकृति प्रेम हो धरती का मान ।।
वसुधा ही कुटुंब है अपना ।
इसको  है संभाल के रखना ।।
पंचतत्व है सभी निराले ।
धरती,अग्नि आकाश संभाले ।।
पशु पक्षी पोखर पर्वत सब ।
वृक्ष नदी तालाब सजा ले ।।
यह सब मिल पर्यावरण बनाएं ।
सूर्य चंद्र मिल सृष्टि सजाएं ।।
वन-दोहन कचरा नदियों का ।
जलाशयों की जान बचायें ।।
पेड़ों का सर्व-समुदाय कट रहा ।
चतुर्थ विश्वयुद्ध आधार बन रहा ।।
हरियाली है हलाल हो रही ।
वायु प्रदूषण जल ह्वास चढ़ रहा ।।
वाहन संख्या का उत्कर्षण।
ध्वनि का बढ़ता कोप समर्पण ।।
अशुद्ध हवा बढ़ता उत्सर्जन ।
कैसे हो मानव तनाव विसर्जन ।।
पृथ्वी एक सूर्य भी एक ।
प्रदूषण के है रूप अनेक ।।
सर्व सुरक्षित रखने का दायित्व ।
बना सभी का साभग दायित्व ।।
फरियादी का ह्वास हो रहा ।
जल का स्तर सदा गिर रहा ।।
वैश्विक ताप चरम पर आज ।
प्रकृति मूल्य का भाव गिर रहा ।।
जब होगा पर्यावरण संरक्षण ।
तब होगा जीवन संवर्धन ।।
पृथ्वी पर पुरुषार्थ जगाए ।
स्वावलंबन का सूर्य उगाएं ।।

लेखक
डॉ. राकेश मिश्र
लखनऊ

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