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लखीमपुर-खीरी : एमए की छात्रा बनी प्रधान,क्या बोली खुद पढ़िए।

एमए की छात्रा बनी प्रधान,क्या बोली खुद पढ़िए।

लखीमपुर-खीरी: जिले में एमए की एक छात्रा ग्राम प्रधान बन गई है. नकहा ब्लॉक के अमकोटवा गांव की अमरुन्निशा महज 22 साल की उम्र में प्रधान बन गई हैं।

बतातें चलें,अमरुन्निशा को उनके पिता ने बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए ही प्रधान पद के चुनाव के लिए खड़ा किया। युवराजदत्त महाविद्यालय में दर्शनशास्त्र से एमए कर रही अमरुन्निशा अब गांव की तस्वीर बदलने की बात कह रहीं हैं। उनका कहना है कि प्रधान बनकर सबसे पहले बेटियों की तालीम के लिए गांव मे अलख जगाउंगी, गांव के विकास के लिए भी काम करुंगी, जब गांवों में बेटियां पढ़ेंगी, अपने हक जानेंगी, तभी गांवों में विकास आएगा।
गांवों में गरीबों का शोषण बन्द होगा तभी विकास की असल बयार बहेगी।

अमरुन्निशा ने लोगों को बताया वोट की ताकत

अमरुन्निशा अमकोटवा गांव के रहने वाले महबूब अली और किस्मतुन्निशा की अकेली औलाद हैं। मां-बाप ने अमरुन्निशा को बेटे की तरह पाला है महबूब दो दशक पहले 10 साल तक गांव के ग्राम प्रधान रह चुके हैं लेकिन, इस बार महिला सीट आई तो महबूब अली ने अपनी पत्नी किस्मतुन्निशा की जगह दर्शनशास्त्र में परास्नातक कर रही बेटी को प्रधानी में खड़ा करने की ठानी,जबकि गांव के लोगों ने उनका विरोध भी किया कि बेटी की जगह पत्नी को खड़ा करो, लेकिन महबूब ने कहा कि बेटी बेटे से कम थोड़ी है।

बता दें,गांव में आठ कैंडीडेट खड़े हुए थे. अमरुन्निशा कहती हैं कि मैंने अपना प्रचार खुद घर-घर जाकर किया। गांव की महिलाओं और पुरुषों से खुद मिलीं, उन्हें वोट की ताकत के बारे में बताया।
गांव के विकास के लिए काम करूंगी उन्होंने कहा कि मुझे सबसे पहले गांव में शिक्षा की अलख जगानी है।
उन्होंने बताया कि मैं नदी को पार कर साइकिल से 10 किलोमीटर दूर पढ़ने जाती थी मेरे पापा ने मुझे अब स्कूटी लेकर दी है मैं दर्शशास्त्र से एमए करने के बाद असिस्टेंट प्रोफेसर का एग्जाम दूंगी, घूमने-फिरने और आजाद ख्यालों की अमरुन्निशा ने बताया कि वो योगी सरकार के मिशन शक्ति से भी जुड़ी हुई हैं, सरस्वती विद्या मन्दिर में जूनियर हाई स्कूल तक पढ़ी अमरुन्निशा कहती हैं कि पापा ने मुझ पर बेटे की तरह भरोसा किया है। अमरुन्निशा कहती हैं वाईडी कॉलेज के सुभाष चंद्रा सर हमेशा मेरे मार्गदर्शक रहे हैं, अब मेरे कंधों पर पूरे गांव के विकास की जिम्मेदारी है, जाति मजहब से ऊपर उठकर सबका साथ सबका विकास की तर्ज पर गांव के समग्र विकास की रूपरेखा बनाकर मैं काम करुंगी।(ए.के.मिश्र)