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लखीमपुर-खीरी : 23 वर्षीय असीमा और 22 की अमरुन्निशा ने ग्राम प्रधान बनकर पेश की मिशन शक्ति की मिसाल।

23 वर्षीय असीमा और 22 की अमरुन्निशा ने ग्राम प्रधान बनकर पेश की मिशन शक्ति की मिसाल।

लखीमपुर।उत्तरप्रदेश के जनपद लखीमपुर खीरी की ब्लॉक ईसानगर अंतर्गत ग्रामसभा भेड़हिया में चालीस वर्षों से प्रधानी करते चले आ रहे एक ही परिवार को 23 साल की असीमा ने हराकर अपनी जीत का परचम लहराया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्रामसभा भेड़हिया में अवधराम मौर्य तीन बार प्रधान रहे तथा एक बार इनकी पत्नी सुशीला देवी भी प्रधान बनीं और इनके पिता चंदीदीन भी चार बार प्रधान रहे।अबकी बार संशोधित आरक्षण घोषित होने पर असीमा खातून ने अनारक्षित सीट पर अपना पर्चा दाखिल किया और लोगों को विश्वास में लेकर असीमा ने भेड़हिया सीट पर अपनी जीत दर्ज की।

वहीं,लखीमपुर खीरी

जिले में 22 वर्षीय एमए की एक छात्रा भी ग्राम प्रधान बनी, लखीमपुर खीरी के नकहा ब्लॉक के अमकोटवा गांव की अमरुन्निशा महज 22 साल की उम्र में ग्राम प्रधान बन गईं। बतातें हैं,नकहा ब्लॉक के अमकोटवा गांव की रहने वाली छात्रा अमरुन्निशा को उनके पिता ने बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए ही प्रधान पद के चुनाव के लिए खड़ा किया।

युवराजदत्त महाविद्यालय में दर्शनशास्त्र से एमए कर रही अमरुन्निशा अब गांव की तस्वीर बदलने की बात कह रहीं हैं। उनका कहना है कि प्रधान बनकर सबसे पहले बेटियों की तालीम के लिए गांव मे अलख जगाऊंगी और गांव के विकास के लिए काम करुंगी। उनका मानना है कि जब गांवों में बेटियां पढ़ेंगी, अपने हक जानेंगी, तभी गांवों में विकास आएगा। जब गांवों में गरीबों का शोषण बन्द होगा तभी विकास की असल बयार बहेगी।

अमरुन्निशा अमकोटवा गांव के रहने वाले महबूब अली और किस्मतुन्निशा की अकेली संतान हैं। मां-बाप ने अमरुन्निशा को बेटे की तरह पाला है, महबूब दो दशक पहले 10 साल तक गांव के ग्राम प्रधान भी रह चुके हैं लेकिन, इस बार महिला सीट आई तो महबूब अली ने अपनी पत्नी किस्मतुन्निशा की जगह दर्शनशास्त्र में परास्नातक कर रही बेटी को प्रधानी में खड़ा करने की ठान ली,जबकि इस पर गांव के लोगों ने उनका विरोध भी किया कि बेटी की जगह पत्नी को खड़ा करो, लेकिन महबूब ने कहा कि बेटी बेटे से कम थोड़ी है और मेरी बेटी ही इसबार प्रधानी का चुनाव लड़ेगी। गांव में आठ कैंडीडेट चुनावी मैदान में थे। अमरुन्निशा कहती हैं कि मैंने अपना प्रचार खुद घर-घर जाकर किया और गांव की महिलाओं और पुरुषों से मैं खुद जाकर मिलीं हूँ और उन्हें उनके वोट की ताकत के बारे में बताया। गांव के विकास के लिए काम करूंगी उन्होंने कहा कि मुझे सबसे पहले गांव में शिक्षा की अलख जगानी है।

उन्होंने यह भी बताया कि मैं नदी को पार कर साइकिल से 10 किलोमीटर दूर पढ़ने जाती थी मेरे पापा ने मुझे अब स्कूटी लेकर दी है मैं दर्शशास्त्र से एमए करने के बाद असिस्टेंट प्रोफेसर का एग्जाम दूंगी, घूमने-फिरने और आजाद ख्यालों की अमरुन्निशा ने बताया कि वह योगी सरकार के मिशन शक्ति से भी जुड़ी हुई हैं, सरस्वती विद्या मन्दिर में जूनियर हाई स्कूल तक पढ़ी अमरुन्निशा कहती हैं कि पापा ने मुझ पर बेटे की तरह भरोसा किया है,उन्होंने बताया कि वाईडी कॉलेज के सुभाष चंद्रा सर हमेशा मेरे मार्गदर्शक रहे हैं, अब मेरे कंधों पर पूरे गांव के विकास की जिम्मेदारी है, जाति मजहब से ऊपर उठकर सबका साथ सबका विकास की तर्ज पर गांव के समग्र विकास की रूपरेखा बनाकर मैं गांव के विकास के लिए निरन्तर काम करुंगी।(ए.के.मिश्र)