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जालंधर : कोरोना वायरस की दूसरी लहर में संक्रमण के बढ़ते हुए मामलों और लॉकडाऊन को देखते हुए चालू वित्त वर्ष में जी.डी.पी. ग्रोथ को बढ़ाना मुश्किल

कोरोना वायरस की दूसरी लहर में संक्रमण के बढ़ते हुए मामलों और लॉकडाऊन को देखते हुए चालू वित्त वर्ष में जी.डी.पी. ग्रोथ को बढ़ाना मुश्किल

जालंधर 25-4-2021

रिपोर्टर-दिपांशु नारंग

इंडिया नाउ 24, ब्यूरो चीफ जालंधर

कोरोना वायरस की दूसरी लहर में संक्रमण के बढ़ते हुए मामलों और लॉकडाऊन को देखते हुए चालू वित्त वर्ष में जी.डी.पी. ग्रोथ को बढ़ाना मुश्किल हो सकता है। इंडस्ट्रियलिस्टों का मानना है कि कोरोना की दूसरी लहर की लड़ी को तोड़ने के लिए पूरे देश को मिलकर लड़ाई लड़नी पड़ेगी। इसके लिए केन्द्र व राज्य सरकारें इंडस्ट्रियलिस्टों के साथ मिलकर लोगों को बेहतर मैडीकल सुविधाएं उपलब्ध करवाने, टीकाकरण को रफ्तार देकर व लेबर का पलायन रोक कर आर्थिक गतिविधियों को भी आगे बढ़ाएं। इसके साथ ही देश की आर्थिक व्यवस्था को मजबूत रखने के लिए सरकारों को उचित कदम उठाने होंगे। लॉकडाऊन कोई समाधान नहीं, इससे इंडस्ट्री डूब जाएगी। केन्द्र व राज्यों सरकारों को चाहिए कि फैक्टरियों को बंद न कर कोरोना के खिलाफ जंग लड़े। इस समय सरकार को चाहिए कि वैक्सीन का उत्पादन बढ़ाए, उनके दामों पर काबू रखें। यूनाइटिड साइकिल एंड पार्ट्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रधान डी.एस. चावला ने कहा कि’इंडस्ट्री को हर हालत में फिक्स खर्चे करने ही पड़ते हैं। केन्द्रीय वित्तमंत्री की तरफ से भी इंडस्ट्री के हक में कोई पॉलिसी नहीं बनाई गई और न ही बैंकों की तरफ से कोई रियायत दी गई थी। वित्तमंत्री इंडस्ट्री को लोन उपलब्ध करवाने की बात कर रही है, जिसका कोई लाभ नहीं है। बैंकों के रेट ऑफ इंटरस्ट को कम करना चाहिए। लॉकडाऊन के खौफ के चलते ट्रासपोर्टरों ने भी माल ढोना बंद कर दिया है, जिस कारण कच्चा माल व तैयार माल की सप्लाई बाधित हो रही है जिसका असर कुछ क्षेत्रों पर सीधे तौर पर पड़ेगा।’ आई.सी.यू. के सैक्रेटरी हरसिमरजीत सिंह ने कहा कि ‘लोगों की सुरक्षा करना सरकारों की जिम्मेदारी है। इस जिम्मेदारी को निभाते हुए देश की अर्थ व्यवस्था को भी नहीं हिलने देना चाहिए। लेबर का पलायन रोकना होगा। पिछली बार लेबर जाने के बाद वापस आ गई और इंडस्ट्री को कुछ राहत मिली थी लेकिन अगर इस बार लेबर वापस चली जाती है तो दोबारा उसको वापस लाना बहुत मुश्किल होगा। अगर ऐसी स्थिति बनती है तो सरकार को लेबर के पी.एफ. से उन्हें वेतन देना चाहिए। एम.एस.एम.ई. इंडस्ट्री पहले ही मंदी की मार झेल रही है।’