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Human Rights Day 2020: जानें, क्यों 10 दिसंबर को मनाया जाता है ‘मानवाधिकार दिवस’

Human Rights Day 2020 इतिहासकारों का मानना है कि ईसा पूर्व 539 में मानवाधिकार की नींव रखी गई थी। जब साइरस ने बेबीलॉन पर विजय हासिल की थी। उस समय सायरस ने सभी बंदी पड़े गुलामों को आजाद कर दिया था। उस समय से मानवाधिकार की बात चल रही है।

दिल्ली। Human Rights Day 2020: ‘मानवाधिकार दिवस’ (Human Rights Day) हर साल 10 दिसंबर को मनाया जाता है। इसे सबसे पहली 10 दिसंबर, सन 1950 ई को मनाया गया था। जब संयुक्त राष्ट्र संघ ने 10 दिसंबर को विश्व ‘मानवाधिकार दिवस’ मनाने की घोषणा की। हालांकि, ‘मानवाधिकार दिवस’ मनाने का प्रस्ताव सन 1948 ई में ही संयुक्त राष्ट्र महासभा में पास हो गया था, लेकिन इसे आधिकारिक मंजूरी सन 1950 ई में मिला। इसके बाद से हर साल 10 दिसंबर को ‘मानवाधिकार दिवस’ मनाया जाता है। भारत में भी ‘मानवाधिकार दिवस’ 10 दिसंबर को ही मनाया जाता है। इसका मुख्य उदेश्य लोगों को मानवाधिकारों के प्रति जागरूक करना है। अगर आपको ‘मानवाधिकार दिवस’ के बारे में नहीं पता है, तो आइए विस्तार से जानते हैं-

‘मानवाधिकार दिवस’ का इतिहास

इतिहासकारों का मानना है कि ईसा पूर्व 539 में मानवाधिकार की नींव रखी गई थी। जब साइरस ने बेबीलॉन पर विजय हासिल की थी। उस समय सायरस ने सभी बंदी पड़े गुलामों को आजाद कर दिया था। उस समय से मानवाधिकार की बात चल रही है। आधुनिक समय में संयुक्त राष्ट्र संघ ने व्यक्ति विशेष के हित और अधिकारों के लिए ‘मानवाधिकार दिवस’ मनाने की घोषणा की है।

भारत में मानवाधिकार आयोग का गठन

भारत में अन्य देशों की तरह ही 10 दिसंबर को ‘मानवाधिकार दिवस’ मनाया जाता है। हालांकि, मानवाधिकार कानून के लिए देश की जनता को चार दशक तक इंतजार करना पड़ा। इसके बाद 28 सितंबर, सन 1993 ई. को मानवाधिकार कानून को मंजूरी मिली। वहीं, 12 अक्टूबर, 1993 ई को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की स्थापना की गई। इसके तहत व्यक्ति विशेष के हितों की रक्षा की बात है। साथ ही लोगों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने का भी लक्ष्य रखा गया।

मानवाधिकार दिवस’ का महत्व

आधुनिक समय में ‘मानवाधिकार दिवस’ का विशेष महत्व है। खासकर ऐसे देशों में इसका महत्व बढ़ जाता है। जहां की सरकार नागरिकों के हितों पर ध्यान नहीं देती है। इसके लिए ‘मानवाधिकार दिवस’ मनाया जाता है। मानवाधिकार के अंतर्गत शिक्षा, सेहत और अधिकार शामिल हैं। साथ ही सभी धर्मों और जाति के लोगों को समान अधिकार दिया गया है।

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