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गोरखपुर : गोल्डेन गर्ल ओलंपिक में दिखाएगी दम:12 साल की दिव्यांग आदित्या की पीवी सिंधू भी हैं दिवानी, न सुन सकती है न बोल सकती है आदित्या

गोरखपुर की गोल्डेन गर्ल ओलंपिक में दिखाएगी दम:12 साल की दिव्यांग आदित्या की पीवी सिंधू भी हैं दिवानी, न सुन सकती है न बोल सकती है आदित्या

गोरखपुर18 मिनट पहले

तपन बोस
इंडिया नाऊ 24
गोरखपुर

गोरखपुर जिले की 12 साल की बैडमिंटन खिलाड़ी आदित्या यादव ब्राजील में होने वाले ओलंपिक में पार्टिसिपेट करेंगी।

गोरखपुर जिले की 12 साल की बैडमिंटन खिलाड़ी आदित्या यादव ब्राजील में होने वाले ओलंपिक में पार्टिसिपेट करेंगी। जन्म के बाद से ही आदित्या दिव्यांग हैं वह न सुन सकती हैं और न ही बोल सकती हैं। लेकिन इनका टैलेंट देश विदेश में शोर मचा रहा है। ओलंपिक के लिए सलेक्ट होने के बाद से ही अपने पिता और परिवार के लोगों से इशारो इशारों में ये बार—बार बोल रही हैं कि इस बार गोल्ड लेकर आउंगी। खेल प्रेमियों के बीच गोल्डेन गर्ल के नाम से मशहूर आदित्या यादव ब्राजील में मूकबधिर वर्ग में ओलंपिक खेलेंगी। आदित्या इस बार मूकबधिर ओलंपिक में भारत की ओर से खेलने वाली सबसे कम उम्र की खिलाड़ी भी होंगी।

जन्म के बाद से ही आदित्या दिव्यांग हैं वह न सुन सकती हैं और न ही बोल सकती हैं।

दैनिक भास्कर से बात करते हुए आदित्या के पिता दिग्विजय यादव ने बताया कि नई दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में 26 से 28 फरवरी तक आयोजित नेशनल सेलेक्शन ट्रायल में उनका चयन हुआ है। बैडमिंटन के ट्रायल में कुल 16 महिला खिलाड़ियों ने क्वालीफाई किया। इनमें चार महिला खिलाड़ियों का चयन ब्राजील ओलंपिक के लिए हुआ है।

जुनून देखकर पीवी सिंधू भी रह गई दंग

आदित्या यादव जब दस साल की थीं, तो उन्होंने चाइना में आयोजित वल्र्ड चैम्पियनशीप में अपने टैलेंट का लोहा मनवाया था। वहीं एक बार जब दिल्ली में आदित्या एक टूर्नामेंट में खेल रही थीं, तब देश की महान बैंडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधू भी उनका गेम देखकर दंग रह गईं थीं। आदित्या के पिता दिग्विजय यादव एक अच्छे बैंडमिंटन खिलाड़ी और कोच भी हैं, लिहाजा पीवी सिंधू ने उनसे बात करके कहा कि आदित्या का गेम अच्छा है, इसे आगे ले जाइए। कोई दिक्कत हो तो हमे भी बताइए। पीवी सिंधू ने आदित्या को कई अच्छे टिप्स भी दिए थे।

आदित्या नहीं मनाती संडे

आदित्या यादव बैडमिंटन को लेकर जुनूनी हैं। इसे ऐसे समझा जा सकता है कि पिछले दो साल से आदित्या ने संडे नहीं मनाया। कोरोना काल में भी घर में दीवार पर प्रैक्टिस करती थीं। उस दौरान फिटनेस पर पूरा ध्यान दिया। उनके पिता दिग्विजयनाथ यादव रेलकर्मी और रेलवे में बैडमिंटन के कोच हैं। उन्होंने ही आदित्या को निखारा है।

एक समय घरवाले हो गए थे उदास

जब आदित्या का जन्म हुआ उसके तीन साल बाद घर वाले ये जाने कि उनकी बेटी सुन बोल नहीं सकती है। इसके बाद एक पिता होने की वजह से दिग्विजय की मुसिबत कई गुना बढ़ गई थी। दिग्विजय यही सोचते थे कि अब अपनी इस बेटी के लिए क्या करें। दिग्विजय बताते हैं कि एक दिन जब आदित्या ने रैकेट पकड़ा उसके पकड़ने के ढंग से ये लगा कि वो खेल सकती है। पांच साल की उम्र में आदित्या खेलने जाने लगी। फिर क्या एक साल बाद ही आदित्या अपने से अधिक एज के खिलाड़ियों को मात देने लगी। वहीं जिस टूर्नामेंट में पार्टिसिपेट करती वो जीतकर आती थी। इस लिए छोटी सी उम्र में आदित्या का नाम गोल्डेन गर्ल पड़ गया।

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