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गोरखपुर : कलेक्ट्रेट कर्मचारी ने जमीन को कराया अपने नाम:DM ने सौंपी SDM सदर को जांच, महराजगंज में तैनात है मनोज

कलेक्ट्रेट कर्मचारी ने जमीन को कराया अपने नाम:DM ने सौंपी SDM सदर को जांच, महराजगंज में तैनात है मनोज

इंडिया नाऊ 24
तपन बोस
गोरखपुर

गोरखपुर के दो कलेक्ट्रेट कर्मचारियों ने फर्जी दस्तावेज लगाकर सरकारी जमीन को अपने नाम करा लिया। बुधवार को मामला सामने आने पर डीएम कृष्णा करूणेश ने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट और एसडीएम सदर को मामले की जांच सौंपी है। डीएम का कहना है कि जांच के बाद रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

दरअसल सदर तहसील के जंगल कौड़िया के मीरपुर निवासी रंभू पुत्र अर्जुन, साधना पत्नी मनोज, ओमप्रकाश पुत्र रंगलाल ने फर्जी दस्तावेज तैयार कर मीरपुर स्थित नवीन परती की 110 एअर जमीन के साथ ही कास्तकार की 460 एअर जमीन जिल्द बंदोबस्त पर फर्जी आदेश बनाकर अपने नाम कर लिया। इन लोगों ने सर्वे नायब तहसीलदार के यहां से बिना केस दर्ज किए षड्यंत्र करके 24 दिसंबर 2020 को एक तरफा आदेश बनाकर जमीन अपने नाम करवा लिया। सर्वे में जब नायब तहसीलदार को पता चला तो उन्होंने एक महीने बाद ही 28 जनवरी 2021 को अपने फर्जी आदेश को तत्काल प्रभाव से खारिज कर दिया।

सर्वे नायब तहसीलदार के आदेश के खिलाफ किया मुकदमा

मामला खारिज होने के बाद कर्मचारी मनोज आदि ने सर्वे नायब तहसीलदार के आदेश के खिलाफ सहायक अभिलेख अधिकारी के यहां मुकदमा दाखिल कर दिया। सहायक अभिलेख अधिकारी ने अधिवक्ताओं के बहस को सुनने के बाद वादी और प्रतिवादी की तरफ से पेश किए गए कागजातों की जांच अपने स्तर से करवाया।

जिसमें पता चला कि रंभू वगैर की तरफ से उपसंचालक चकबंदी दीवान बाजार में वाद संख्या 1821 धारा 9 31/12 /1993 नाम का कोई मुकदमा चला ही नहीं है। ना ही राजस्व अभिलेखागार में संचित चकबंदी अधिकारी की मिसिल बंद में पत्रावली के संबंध में वाद का अंकन था। जिसके आधार पर सहायक अभिलेख अधिकारी ने रंभू वगैरह की तरफ से लगाए गए कागजातों को फर्जी पाया।

जिलाधिकारी कृष्णा करूणेश ने एसडीएम सदर को जांच सौंप कर रिपोर्ट मांगी है।

बच्चों के नाम कराता था जमीन

ये फर्जी तरीके से नवीन परती की जमीनों को अपने व अपने बच्चों के नाम करा कर दूसरों को मोटी रकम लेकर बेचने का काम करते हैं। मीरपुर में 110 एयर के अलावा मनोज, अर्जुन, रंगलाल, रंभू, साधना और ओमप्रकाश ने नवीन परती की अन्य जमीनों को भी अपने नाम कराकर अन्य व्यक्तियों को बेचने का काम कर चुके हैं। जिसकी जांच डीएम ने एसडीएम सदर को सौंपा है। डीएम कृष्णा करुणेश ने बताया की जांच रिपोर्ट आने के बाद उक्त जालसाजों के ऊपर मुकदमा दर्ज करा कर जेल भेजने का काम किया जाएगा। जिससे अन्य कोई कर्मचारी जालसाजी न करें।

महराजगंज में तैनात है मनोज

मनोज पहले गोरखपुर कलेक्ट्रेट में सदर तहसील का कनिष्क लिपिक था। वर्तमान में वह महराजगंज के आनंदनगर तहसील में कनिष्क लिपिक के पद पर तैनात है। उसके पिता हरिदास भी गोरखपुर कलेक्ट्रेट में कर्मचारी थे। पिता की जगह पर ही मृतक आश्रित कोटे से मनोज नौकरी पाया था। वहीं, उसके चाचा अर्जुन भी कलेक्ट्रेट गोरखपुर में तैनात थे। वह इस समय रिटायर हो चुके हैं। नौकरी में रहने के दौरान मनोज ​के ​पिता हरिदास व चाचा अर्जुन भी कई जमीनों को अपने नाम कर चुके हैं।

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