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उद्योग की बहार में बाधक बन गए बैंक..

स्वावलंबी बनने की ओर युवा पीढ़ी उड़ान नहीं भर पा रही है। दौड़भाग के बाद उनका सपना चकनाचूर हो जा रहा है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम जनपद में कारगर नहीं साबित हो रहा है। इसकी अहम कड़ी बैंक उद्योगों की बहार में बाधक बन गए हैं। ऋण संबंधी आवेदन बड़ी संख्या में अस्वीकृत कर दिए जा रहे हैं। रोजगारपरक योजनाओं में शासन से आवंटित मार्जिन मनी का बजट तक खर्च नहीं हो पा रहा है। लक्ष्य प्राप्ति के लिए विभाग को जोर आजमाइश करनी पड़ रही है। पीएम रोजगार सृजन कार्यक्रम में 45 लाख डंप

प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम में मार्जिन मनी के रूप में 126 लाख रुपये बजट आवंटित हुआ था। कुल 289 आवेदन प्राप्त हुए। बैंकों ने महज 64 आवेदन स्वीकार किया। वहीं केवल 30 लाभार्थियों में ऋण वितरित हुआ। जबकि 25 फीसद मार्जिन मनी विभाग जमा करता है। कुल 81 लाख रुपये मार्जिन मनी खर्च हुआ। इस योजना में 45 लाख रुपये बजट डंप है। मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार में 123 लाख अवशेष

मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना में 147 लाख रुपये बजट आवंटित हुआ था। कुल आवेदन 327 प्राप्त हुए। बैंकों में 43 आवेदनों को स्वीकृति मिली। केवल 18 लोगों को ऋण वितरित हुआ। मार्जिन मनी 24 लाख खर्च हुआ। अभी मार्जिन मनी का 123 लाख रुपये बजट डंप है। एक जनपद-एक उत्पाद में 104 आवेदन निरस्त

एक जनपद-एक जनपद उत्पाद में मार्जिन मनी में 35 फीसद तक छूट है। शासन ने एक करोड़ का बजट आवंटित किया था। 138 आवेदन में से 104 निरस्त हो गए। 34 स्वीकृत हुए और ऋण महज 24 वितरित हुआ। इसमें 31 लाख रुपये मार्जिन का खर्च हुआ है। 69 लाख रुपये डंप है। एसबीआइ और यूपी बड़ौदा बैंक का नहीं मिल रहा सहयोग

रोजगारपरक ऋण योजनाओं में एसबीआइ और यूपी बड़ौदा बैंक का सहयोग नहीं मिल पा रहा है। एसबीआइ के विभिन्न शाखाओं में 112 आवेदन निरस्त किए गए हैं। जिले भर में यह बैंक केवल तीन आवेदन स्वीकार किया है। यूपी बड़ौदा ने 70 आवेदनों को निरस्त किया है। डीएम भी हुए नाराज

पिछले दिनों समीक्षा बैठक के दौरान बैंकों के असहयोग पर डीएम आशुतोष निरंजन ने भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने वित्तीय वर्ष के आखिरी तक सभी ऋण योजनाओं का लक्ष्य पूरा करने के निर्देश दिए है। ऋण योजनाओं में आवेदन की तिथि 15 जनवरी 2021 तक बढ़ा दी गई है। आनलाइन आवेदन की व्यवस्था है। बैंकों के परस्पर सहयोग के लिए प्रयास किया जा रहा है।