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डीएम के आदेश को ‘ठेंगा’: गोरखपुर के नामी स्कूल ने गरीब बच्चों का दाखिला करने से किया इंकार, एक महीने तक घुमाया

डीएम के आदेश को ‘ठेंगा’: गोरखपुर के नामी स्कूल ने गरीब बच्चों का दाखिला करने से किया इंकार, एक महीने तक घुमाया

​अभिभावक का आरोप: जिलाधिकारी के अनुमोदन और BSA के कड़े पत्र के बावजूद एवरग्रीन वर्ल्ड स्कूल नहीं दे रहा एडमिशन


गोरखपुर, 16 मई 2026 निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 के तहत गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने के सरकार के दावों को गोरखपुर का एक निजी स्कूल खुलेआम ठेंगा दिखा रहा है। जिलाधिकारी (DM) के अनुमोदन और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) द्वारा आधिकारिक आवंटन पत्र जारी किए जाने के एक महीने बाद भी ‘एवरग्रीन वर्ल्ड स्कूल’ (विजय चौक, गोरखपुर) ने आवंटित बच्चों का दाखिला लेने से साफ इंकार कर दिया है।

​एक महीने तक ‘फोन करेंगे’ कहकर टाला, अब सीधे ‘नो एंट्री’
पीड़ित अभिभावकों ने बताया कि कार्यालय जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, गोरखपुर द्वारा जारी पत्रांक संख्या (समग्र शिक्षा/आर०टी०ई०/18698-19158/2025-26) के तहत उनके बच्चों का चयन द्वितीय चरण की लॉटरी में कक्षा-1 के लिए इस विद्यालय में हुआ था। आवंटन पत्र मिलने के तुरंत बाद अभिभावकों ने विद्यालय प्रशासन को सारे जरूरी दस्तावेज और सरकारी आदेश की प्रति सौंप दी थी।

लेकिन विद्यालय प्रबंधन ने तीन कार्य दिवस के भीतर दाखिला करने के सरकारी निर्देश को ताक पर रखकर अभिभावकों को ‘फोन करके बताया जाएगा’ का झांसा देकर एक महीने तक दौड़ाया। आज जब एक महीना बीतने पर अभिभावक पुनः स्कूल पहुंचे, तो स्कूल प्रशासन ने सीधे कह दिया कि “आपका एडमिशन नहीं हो पाएगा”, जो कि सीधे तौर पर जिला प्रशासन और शासन के आदेशों की अवहेलना है।

लॉटरी और सरकारी आदेश की खुली अवहेलना

बताते चलें कि बेसिक शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार, आरटीई पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन लॉटरी द्वारा आवंटित इन बच्चों को विद्यालय में तीन कार्य दिवस के भीतर निःशुल्क प्रवेश दिया जाना अनिवार्य था। आवंटित सूची में आरध्‍या भगत (रजिस्ट्रेशन ID: 395442) और सिद्धिका कनौजिया (रजिस्ट्रेशन ID: 388380) जैसी छात्राएं शामिल हैं, जो क्रमशः दुर्बल और अलाभित वर्ग से आती हैं।

​मान्यता रद्द होने और कठोर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी बेअसर

BSA गोरखपुर, धीरेन्द्र त्रिपाठी द्वारा जारी आधिकारिक पत्र में स्पष्ट चेतावनी दी गई थी कि यदि किसी भी स्तर पर निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम की धारा 12 (1) (ग) का उल्लंघन पाया गया या प्रवेश से मना किया गया, तो विद्यालय के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, जिसकी जिम्मेदारी प्रबंधक और प्रधानाध्यापक की होगी। इसके बावजूद स्कूल प्रबंधन के हौसले बुलंद हैं और वे गरीब बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं।

​इस मामले की शिकायत अब दोबारा जिलाधिकारी और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से कर विद्यालय की मनमानी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई और स्कूल की मान्यता रद्द करने की मांग की जा रही है।

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