गुरुग्राम : तेल प्रौद्योगिकी संघ (ओटीएआई) एवं फेयर लैब्स द्वारा पाम ऑयल के पोषण एवं कार्यात्मक पहलुओं पर उच्चस्तरीय वैज्ञानिक संगोष्ठी का आयोजन

रिपोर्टर इंडिया नाउ 24 सुरेंद्र गुरुग्राम
तेल प्रौद्योगिकी संघ (ओटीएआई) एवं फेयर लैब्स द्वारा पाम ऑयल के पोषण एवं कार्यात्मक पहलुओं पर उच्चस्तरीय वैज्ञानिक संगोष्ठी का आयोजन

गुरुग्राम, 21 फरवरी 2026। तेल प्रौद्योगिकी संघ (Oil Technologists’ Association of India – ओटीएआई) एवं फेयर लैब्स (FARE Labs) द्वारा गुरुग्राम के इन्फोसिटी-1, सेक्टर-34 स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में “पाम ऑयल के पोषण एवं कार्यात्मक पहलू” विषय पर एक उच्चस्तरीय वैज्ञानिक संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी में देश के विभिन्न भागों से आए प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं तथा उद्योग प्रतिनिधियों ने सहभागिता कर पाम ऑयल के पोषण, स्वास्थ्य, गुणवत्ता, सुरक्षा एवं औद्योगिक उपयोग से जुड़े विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ ओटीएआई (उत्तरी क्षेत्र) के अध्यक्ष श्री सी.एस. जोशी के स्वागत संबोधन से हुआ। इसके पश्चात ओटीएआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राजीव चुरी एवं उद्योग प्रतिनिधियों ने विषय की प्रासंगिकता पर अपने विचार व्यक्त किए।
फेयर लैब्स की अध्यक्ष डॉ. मीनाक्षी त्रिपाठी ने “विश्वसनीय परीक्षण, निरीक्षण एवं प्रमाणन (टीआईसी) सेवाओं के माध्यम से गुणवत्ता एवं सुरक्षा तंत्र को सुदृढ़ बनाना” विषय पर संस्थागत प्रस्तुति दी और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में प्रयोगशाला तंत्र की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।
मुख्य अतिथि डॉ. एस.के. सिंह, उप महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने देश में खाद्य तेल सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान, उन्नत कृषि तकनीकों तथा टिकाऊ खेती पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। विशिष्ट अतिथि डॉ. प्रभात कुमार, बागवानी आयुक्त, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने तेल पाम की खेती को बढ़ावा देने हेतु सरकार की पहलों की जानकारी साझा की।
अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. टी. मोहापात्रा, अध्यक्ष, पादप किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (PPVFRA) ने नवाचार, उन्नत किस्मों के संरक्षण तथा किसान-केंद्रित नीतियों की आवश्यकता को रेखांकित किया। मुख्य वक्तव्य में श्री डी. माथुर, पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, फेयर लैब्स ने पाम ऑयल के संबंध में वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित संतुलित दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया।
तकनीकी सत्रों में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद; भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–भारतीय तेल पाम अनुसंधान संस्थान, पेदावेगी; हार्कोर्ट बटलर प्राविधिक विश्वविद्यालय, कानपुर; अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली; कलकत्ता विश्वविद्यालय; रासायनिक प्रौद्योगिकी संस्थान, मुंबई; तथा पारस अस्पताल, गुरुग्राम के विशेषज्ञों ने अपने शोध निष्कर्ष प्रस्तुत किए।
प्रस्तुतियों में पाम ऑयल की संरचना, फैटी एसिड प्रोफाइल, ऑक्सीडेटिव स्थिरता, कोलेस्ट्रॉल चयापचय, लिपिड मेटाबॉलिज्म, कार्डियोमेटाबॉलिक स्वास्थ्य तथा संभावित प्रक्रिया-संदूषकों की पहचान पर वैज्ञानिक विश्लेषण शामिल रहे।
प्रो. आर.पी. सिंह की अध्यक्षता में आयोजित पैनल चर्चा में वैज्ञानिकों, नीति-निर्माताओं और उद्योग विशेषज्ञों ने खाद्य तेलों पर वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित संवाद को प्रोत्साहित करने, घरेलू उत्पादन को सुदृढ़ बनाने, गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली को मजबूत करने तथा संतुलित एवं जिम्मेदार उपभोग को बढ़ावा देने पर सहमति व्यक्त की।
कार्यक्रम का समापन डॉ. एच.बी. सिंह, संपादक-इन-चीफ, जर्नल ऑफ लिपिड साइंस एंड टेक्नोलॉजी (JLST) द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
संगोष्ठी के सफल आयोजन में मीडिया समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सुश्री सेजल द्विवेदी ने पूरे कार्यक्रम के दौरान मीडिया समन्वय का दायित्व सहजता एवं दक्षता के साथ निभाया, जिसके परिणामस्वरूप कार्यक्रम का व्यापक एवं सकारात्मक प्रसार सुनिश्चित हो सका।
यह संगोष्ठी पाम ऑयल के पोषण, स्वास्थ्य एवं औद्योगिक पहलुओं पर वैज्ञानिक समझ को सुदृढ़ करने तथा कृषि, उद्योग और स्वास्थ्य क्षेत्र के मध्य समन्वय को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुई।



